एनपीसीआई के एकाधिकार के विकेंद्रीकरण की योजना टाली गई

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नई दिल्ली, 10 सितंबर (हि.स.)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नई इंटेटीज (वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों) को डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की अनुमति देने की योजना को कुछ समय के लिए टाल दिया है। इस योजना के तहत नई एंटिटीज को डिजीटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बनाने की इजाजत दी जानी थी, ताकि इस क्षेत्र में नेशनल पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के एकाधिकार को समाप्त कर इस पूरी व्यवस्था को विकेंद्रित किया जा सके। लेकिन डाटा सिक्योरिटी को लेकर एक्स्पर्ट्स द्वारा जताई गई आशंका को देखते हुए फिलहाल इस योजना को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल नए डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बनाने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगाया था। उसके बाद एमेजॉन, गूगल और फेसबुक समेत कुछ अन्य कंपनियों ने भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर कंसोर्सियम तैयार किया था। ऐसे छह कंसोर्सियम ने मिलकर न्यू अंब्रेला एंटिटीज (एनयूई) के लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। विदेशी कंपनियों ने कंसोर्सियम बनाने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा ग्रुप जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की थी। न्यू अंब्रेला एंटिटीज (एनयूई) के लाइसेंस के लिए आवेदन करने के क्रम में वित्त मंत्रालय ने यूनियन बैंक और भारतीय स्टेट बैंक पर आवेदन करने से रोक लगा दी थी, क्योंकि ये दोनों बैंक नेशनल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के शेयर होल्डर हैं।

दूसरी ओर नई एंटिटीज को डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बनाने की अनुमति देने की भारतीय रिजर्व बैंक की योजना का भारतीय बैंकों की ओर से शुरू से ही लगातार विरोध किया जा रहा था। बैंक यूनियंस का कहना था कि डिजिटल पेमेंट नेटवर्क प्लेटफॉर्म बनाने के काम में विदेशी वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को अनुमति देने से डाटा सिक्योरिटी पर हमेशा खतरा बना रहेगा। इसके साथ ही सरकारी बैंकों को नेशनल पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया का शेयर होल्डर होने की वजह से इस प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं देने की वजह से भी बैंकिंग सेक्टर इस पूरी प्रक्रिया का विरोध कर रहा था। बैंकिंग संघ ने इस क्रम में भारतीय रिजर्व बैंक से पूरी लाइसेंस प्रक्रिया को रद्द करने और नेशनल पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया को सरकारी बैंकों की मदद से ही और मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया था।

बहरहाल, बैंकिंग सेक्टर के विरोध के और एक्सपर्ट्स की सलाह लेने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने इस प्रक्रिया को डाटा सिक्योरिटी के नाम पर कुछ समय के लिए टाल दिया है। रिजर्व बैंक की ओर से फेसबुक और गूगल जैसी किसी भी कंपनी का नाम लेने से बचते हुए कहा गया है कि आवेदन करने वाली कुछ कंपनियां डाटा सिक्योरिटी को लेकर पहले भी विवादों में रही हैं। इसके साथ ही विदेशी कंपनियां डाटा सिक्योरिटी के मामले में अभी तक खुद को विश्वसनीय साबित नहीं कर सकी हैं। इसलिए जब तक डाटा सिक्योरिटी का फुलप्रूफ प्लान तैयार नहीं हो जाता, तब तक ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में नेशनल पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया का एकाधिकार पहले की तरह बना रहेगा। इसके साथ ही इसके विकेंद्रीकरण की दिशा में, खासकर नई एंटिटीज को शामिल करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।


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