भारत-ऑस्ट्रेलिया ने नौसैनिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए किया समझौता

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दोनों नौसेनाओं को द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रूप से काम करने में मदद करेगा दस्तावेज

 इस साल के अंत में मालाबार अभ्यास में भी भाग लेंगी क्वाड समूह के चारों देशों की नौसेनाएं



नई दिल्ली, 19 अगस्त (हि.स.)। क्वाड समूह के सदस्य भारत और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं के प्रमुखों ने बुधवार को विभिन्न स्तरों पर दोनों सेनाओं के बीच बातचीत को कारगर बनाने के लिए एक मार्गदर्शन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। चार देशों को मिलाकर बनाए गये ‘चतुर्भुज सुरक्षा संवाद’ को क्वाड के रूप में भी जाना जाता है जिसके सदस्य अमेरिका और जापान भी हैं। चारों देशों के बीच लगातार सुरक्षा मुद्दों पर वार्ता होती रही है।

नौसेना ने एक बयान में कहा कि ‘ऑस्ट्रेलिया-भारत नौसेना के लिए नौसेना संबंध के लिए संयुक्त मार्गदर्शन’ दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए एक वर्चुअल समारोह आयोजित किया गया था जिसमें भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के प्रमुख एडमिरल माइकल जे नूनन शामिल हुए।

नौसेना ने कहा कि यह दस्तावेज व्यापक रणनीतिक साझेदारी के मुद्दे पर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की सहमति से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के लिए साझा दृष्टिकोण सुनिश्चित करना है। क्वाड समूह के सदस्य चारों देशों की नौसेनाएं इस साल के अंत में मालाबार नौसेना अभ्यास में भी भाग लेंगी। ऑस्ट्रेलिया के साथ नौसैनिक संबंध ऐसे समय में मजबूत हुए हैं जब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में 15 महीने से अधिक लंबा सैन्य गतिरोध है।

नौसेना ने कहा कि भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई द्विपक्षीय रक्षा संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी, पारस्परिक रसद समर्थन समझौता, त्रिपक्षीय समुद्री सुरक्षा कार्यशाला का संचालन और मालाबार अभ्यास में ऑस्ट्रेलियाई नौसेना की भागीदारी मील के पत्थर हैं जो दोनों नौसेनाओं की भूमिका को रेखांकित करते हैं। हाल के दिनों में इस संबंध को और मजबूत करने के मकसद से दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह दस्तावेज भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण होगा।

नौसेना के बयान में कहा गया है कि दोनों नौसेनाओं के द्विपक्षीय और बहु-पक्षीय रूप से काम करने के इरादे को प्रदर्शित करने के लिए यह दस्तावेज ‘संयुक्त मार्गदर्शन’ के रूप में कार्य करेगा। इसका व्यापक दायरा आपसी समझ विकसित करने, क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सहयोग करने पर केंद्रित है। इसके अलावा पारस्परिक रूप से लाभकारी गतिविधियों में एक-दूसरे को सहयोग और अंतःक्रियाशीलता विकसित करना भी इस समझौते का मकसद है। दस्तावेज में हिन्द महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस), पश्चिमी प्रशांत नौसेना संगोष्ठी (डब्ल्यूपीएनएस), हिन्द महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) सहित क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों में घनिष्ठ सहयोग पर फोकस किया गया है।


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