भड़काऊ नारेबाजी मामले में वकील अश्विनी उपाध्याय को मिली जमानत

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नई दिल्ली, 11 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट उद्भव कुमार जैन ने 08 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से धर्म विशेष के खिलाफ नारेबाजी करने के मामले में वकील अश्विनी उपाध्याय को 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी है।

सुनवाई के दौरान अश्विनी उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा था कि आरोपित अंतिम व्यक्ति होगा अगर वह हेट स्पीच का समर्थन करेगा। अगर हेट स्पीच की अनुमति दी गई तो देश बंट जाएगा। आरोपित के घटना में लिप्त होने का क्या प्रमाण है। दिल्ली पुलिस कह रही है कि वीडियो की जांच चल रही है। वीडियो में जो व्यक्ति हेट स्पीच दे रहा है उसे गिरफ्तार करना चाहिए। गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन कर की गई है। अगर इसकी अनुमति दी गई तो हर किसी की गिरफ्तारी होगी।

विकास सिंह ने कोर्ट से कहा था कि वे न केवल वकील अश्विनी उपाध्याय के लिए पेश हो रहे हैं बल्कि इस तरह की गिरफ्तारी की अनुमति नहीं होनी चाहिए। जो वीडियो वायरल हुए थे वे 8 अगस्त के शाम पांच बजे के हैं। पुलिस बिना किसी पुख्ता संदेह के आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है। वकीलों ने कहा कि अगर वाकया अश्विनी उपाध्याय के सामने हुई होती तो हम उनका पक्ष लेने के लिए खड़े नहीं होते। विकास सिंह ने कहा था कि धारा 153ए के तहत ये जरूरी है कि आरोपित के कहने पर नारे लगाए गए होते। आरोपों का समय देखने की जरूरत है। पुलिस ने केस दर्ज करने के लिए आधी रात तक का समय क्यों लिया। आरोपित को उस जगह की घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है जहां से वो जा चुका हो।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील अतुल श्रीवास्तव ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि घटना की गंभीरता और तारीख देखने की जरूरत है। कोरोना की महामारी का समय है। ऐसे समय में आरोपित ने काफी लोगों को एकत्र किया। इलाके में जश्न का माहौल था। संसद का सत्र चल रहा था , ऐसे में इलाके की संवेदनशीलता को देखना चाहिए। उन्हें ये कार्यक्रम 15 अगस्त के बाद करना चाहिए था या महामारी खत्म होने तक इंतजार करना चाहिए था। तब कोर्ट ने श्रीवास्तव से पूछा था कि हम केवल धारा 153ए पर बात करें। क्या आपने जांच अधिकारी से पूछा था वो घटनास्थल पर मौजूद था कि नहीं। जब नारे लगाए गए तो क्या वो वहां मौजूद था। तब श्रीवास्तव ने कहा था कि वो गैरकानूनी भीड़ थी। इसमें धारा 149 भी है । आरोपित की मौजूदगी में कोई हेट स्पीच देता है तो धारा 149 लगेगी। आरोपित ने इसकी सूचना तक पुलिस को नहीं दी। आरोपित कह रहे हैं कि वे नारे लगने के समय चले गए थे जो जांच का विषय है। इसे लेकर कोई साक्ष्य नहीं है।

पिछले 10 अगस्त को कोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय समेत चार आरोपितों को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। कोर्ट ने दो आरोपितों को आज तक की पुलिस हिरासत में भेजा था। दिल्ली पुलिस ने 9 अगस्त को अश्विनी उपाध्याय को पूछताछ के लिए बुलाया था। पूछताछ के बाद सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 9 अगस्त को एफआईआर दर्ज की थी। उल्लेखनीय है कि 8 अगस्त को जंतर-मंतर पर भारत जोड़ो आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया था जिसमें धर्म विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी की गई थी।


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