छठे परीक्षण में भी खरी उतरी मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल

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ढाई किमी. के रेंज में चल रहे टैंक को मार गिराने में सक्षम है एमपीएटीजीएम

 मिसाइल ने लक्ष्य बनाकर रखे गए टैंक पर सटीक हमला करके नष्ट कर दिया

 सेना के लिए तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी मिसाइल हासिल करने का रास्ता साफ



नई दिल्ली, 21 जुलाई (हि.स.)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बुधवार को स्वदेशी रूप से विकसित कम वजन वाली मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) का आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में छठा परीक्षण किया। मिसाइल ने लक्ष्य बनाकर रखे गए टैंक पर सटीक हमला करके उसे नष्ट कर दिया। इस परीक्षण ने सेना के लिए तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी मैन पोर्टबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हासिल करने का रास्ता बना दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ को बधाई दी है।

डीआरडीओ ने एक बयान में कहा है कि आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने और भारतीय सेना को मजबूत करने के लिए मिसाइल को थर्मल साइट के साथ मैन पोर्टेबल ट्राइपॉड से दागा गया और इसके निशाने पर एक नकली सक्रिय टैंक था। मिसाइल ने टॉप अटैक मोड में लक्ष्य को निशाना बनाया और इसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया। इस दौरान मिशन के सभी उद्देश्य हासिल किए गए। डीआरडीओ ने कहा कि परीक्षण के दौरान इस मिशन के सभी उद्देश्यों को पूरा कर लिया गया। इस मिसाइल का अधिकतम सीमा तक उड़ान का परीक्षण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। मिसाइल को उन्नत एवियोनिक्स के साथ अत्याधुनिक लघु इन्फ्रारेड इमेजिंग तकनीक के साथ लैस किया गया है।

‘दागो और भूल जाओ’ की तकनीक वाली इस पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का आज किया गया छठा सफल परीक्षण था। इस परीक्षण ने सेना के लिए तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी मैन पोर्टबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हासिल करने का रास्ता बना दिया है। इस परीक्षण ने मिसाइल की न्यूनतम सीमा को सफलतापूर्वक सत्यापित किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ को बधाई दी है।

मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम)

यह तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) नाम से निकाली गई मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है। इसका विकास भारतीय कंपनी वीईएम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की साझेदारी में डीआरडीओ ने किया है। एटीजीएम कम वजन वाली लंबी बेलनाकार मिसाइल है, जिसके मध्य भाग के चारों ओर चार पंखों का समूह होता है। इसे उच्च-विस्फोटक एंटी-टैंक वारहेड के साथ लगाया गया है। इस मिसाइल की लंबाई लगभग 1,300 मिमी. है और वजन कम रखने के लिए एल्यूमीनियम और कार्बन फाइबर लॉन्च ट्यूब के साथ लगभग 120 मिमी का व्यास रखा गया है।

मिसाइल का कुल वजन 14.5 किलोग्राम और इसकी कमांड लॉन्च यूनिट (सीएलयू) का वजन 14.25 किलोग्राम है जो लेजर ऑल-वेदर को डिजिटल ऑल-वेदर के साथ जोड़ती है। इसकी मारक क्षमता लगभग 2.5 किमी है। इसके अब तक पांच परीक्षण किये जा चुके हैं। पहला और दूसरा परीक्षण 15 और 16 सितम्बर, 2018 को सफलतापूर्वक किया गया। इसके बाद तीसरा और चौथा सफल परीक्षण 13-14 मार्च, 2019 को राजस्थान के रेगिस्तान में किया गया। 11 सितम्बर, 2019 को आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में मिसाइल का फिर से परीक्षण किया गया। इसमें एक मैन पोर्टेबल ट्राइपॉड लांचर का उपयोग किया गया। परीक्षण का लक्ष्य एक डमी टैंक था, जिसे मिसाइल ने सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था।


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