यूएन के विशेषज्ञों ने फरीदाबाद के खोरी में सामूहिक विस्थापन पर जताई चिंता

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जिनेवा, 17 जुलाई (हि.स.)। यूएन के विशेषज्ञों ने हरियाणा के फरीदाबाद के खोरी में लोगों के सामूहिक विस्थापन को रोकने का आग्रह किया है। यूएन का कहना है कि महामारी के समय में लोगों की सुरक्षा जरूरी है। इसे देखते हुए सामूहिक विस्थापन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कोरोना काल में खोरी के बाशिंदों को हटाने के सुप्रीम कोर्टके निर्णय को बेहद चिंताजनक बताया है।

दरअसल, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के लिए छह सप्ताह की समय सीमा निर्धारित की थी, जो 19 जुलाई को समाप्त होगी। इसके मद्देनजर एमसीएफ ने बुधवार को लोगों को हटाने का अभियान शुरू कर दिया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। पुलिस ने गांव में प्रवेश और निकास द्वार पर भारी बेरिकेडिंग लगा रखी थी।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को चिंताजनक बताते हुए यूनाइटेड नेशंस कमिशन फॉर ह्यूमन राइट्स के हाई कमिश्नर ने भारतीय सरकार से आग्रह किया है कि उन लोगों को अपने घरों से ना हटाएं जो अधिकतर अल्पसंख्यक हैं और हाशिए पर जीने वाले समुदाय के हैं। इन लोगों में शामिल बच्चों और महिलाओं का सम्मान किया जाए।

यूएन की ओर से सरकार से अपनी योजनाओं की तत्काल समीक्षा करने और निपटान को नियमित करने पर विचार करने का आग्रह किया गया है। यूएन ने कहा है कि किसी को भी पर्याप्त और समय पर मुआवजे और निवारण के बिना जबरन बेदखल नहीं किया जाना चाहिए। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि बड़े पैमाने पर विस्थापन का यह कार्य महामारी के दौरान नहीं किया जाए।


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