स्मरण हठ योग गुरु बीकेएस अयंगार का

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नई दिल्ली, 19 जून (हि.स)। भारत के योग गुरुओं में बेल्लुर कृष्णमाचारी सुंदरराजा अयंगार का ऊंचा स्थान रहा है। वे देश-दुनिया में बीकेएस अयंगार के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने ही ‘अयंगार योग’ की स्थापना की और योग की इस पद्धति को दुनिया में प्रसिद्ध किया।

साल 2002 में भारत सरकार ने उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में कार्य के लिए पद्मभूषण तथा 2014 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। ‘टाइम’ पत्रिका ने 2004 में दुनिया के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों की सूची में उनका नाम शामिल किया था। अयंगार ने जिन प्रसिद्ध लोगों को योग सिखाया, उनमें जिद्दू कृष्णमूर्ति, जयप्रकाश नारायण, येहुदी मेनुहिन जैसे नाम सम्मिलित हैं।

आधुनिक ऋषि के रूप में विख्यात अयंगार ने विभिन्न देशों में अपने संस्थान की 100 से अधिक शाखाएं स्थापित की। यूरोपीय देशों में योग फैलाने में वे काफी आगे रहे।

अयंगार कर्नाटक के बेल्लूर में वर्ष 1918 में पैदा हुए थे। 1937 में वे महाराष्ट्र के पुणे शहर चले गये। वहीं योग का प्रसार करने के बाद 1975 में योग विद्या नाम से अपना संस्थान शुरू किया, जिसकी आगे चलकर देश-विदेश में कई शाखाएं खोली गईं। उन्होंने योग पर तीन पुस्तकें लिखी हैं- ‘लाइट ऑन योग’, ‘लाइट ऑन प्राणायाम’ और ‘लाइट ऑन योग सूत्र ऑफ पतंजलि’। ‘लाइट ऑफ योगा’ का अब तक 18 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

बीकेएस. अयंगार ने अयंगर योग की सृष्टि की थी। उन्होंने योग की पहली शिक्षा अपने गुरु श्री तीरूमलाई कृष्णामाचार्य से प्राप्त की थी, जो संयोगवश उनके संबंधी भी थे। योग की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्हें योग इतना प्रिय हो गया कि इस ज्ञान को स्वयं तक सीमित न रखकर सभी में बांटना चाहते थे। इस इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने भारत सहित लंदन, पेरिस, स्वीट्जरलैंड आदि देशों की यात्रा की और योग का प्रचार किया।

स्वयं में विशेष है ‘अयंगर योग’

कई अनुसंधानों के बाद उन्होंने ‘अयंगर योग’ के तरीकों का आविष्कार किया था। स्मरण रहे कि योग अभ्यास आठ पहलुओं (अष्टांग योग) पर आधारित होते हैं। लोकप्रियता के कारण इस योग का नाम अयंगर योग पड़ गया।

अयंगर योग में 200 आसन हैं। 14 प्राणायम हैं, जो क्रमानुसार सरल से जटिलतर होते जाते हैं। अयंगर योग के आसन और प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए उसके मुद्रा/अवस्था पर ध्यान देना सबसे जरूरी होता है। योग गुरु बीकेएस. अयंगार ने आसनों को सही तरह से करने के लिए कुछ सहायक चीजों का आविष्कार किया था। जैसे, ब्लॉक, बेल्ट, रस्सी और लकड़ी की बनी चीजें आदि।

योग को सही मुद्रा में करने के लिए व्यक्ति के शरीर का संरचनात्मक ढांचा सही रूप में होना जरूरी होता है। उनका मानना था कि अगर आसन को सही तरह से किया जाए तो शरीर और मन को नियंत्रण में रखा जा सकता है- जिससे शरीर स्वस्थ तो रहता ही है। बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी शरीर में बढ़ जाती है। योग गुरु बीकेएस अयंगर का मानना था कि परिवर्तन व्यक्ति में बदलाव लाने में मदद करता है।

 


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