शारीरिक और मानसिक क्षमता में होती है वृद्धि प्राणिक हीलिंग से

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प्राचीनतम कला से शरीर के प्राकृतिक क्षमता में सुधार



वाराणसी, 16 जून (हि.स.)। कोरोना काल में आयुर्वेद और एलोपैथी को लेकर भले ही विवाद रहा। लेकिन आम आदमी ने संकट काल में एलोपैथी, होमियोपैथ और आयुर्वेद की दवा खाकर खुद को स्वस्थ रखा। संकटकाल के दौर में इलाज के लिए लोगों का नजरिया था कि कोई भी विधा हो उन्हें इस महामारी से सुरक्षित रखे।
 कोरोना काल में योग विद्या प्राणिक हीलिंग ने भी लोगों को स्वस्थ बनाने में महती भूमिका निभाई। प्राणिक हीलिंग एक प्राचीनतम कला और विज्ञान है,जिसके कारण प्राण शक्ति या जीवन शक्ति को समुचित उपयोग कर शरीर की प्राकृतिक क्षमता में सुधार और वृद्धि की जाती है। जिससे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत बन सके। इस विधा का उद्देश्य लोगों में स्वस्थ्य एवं जीवन शैली का विकास, ऊर्जा उपचार, प्राणायाम एवं ध्यान प्रक्रिया को बढ़ावा देना है।
बांसफाटक स्थित हिन्दू सेवा सदन अस्पताल के प्राणिक हीलर के प्रशिक्षक डॉ.दिनेश राय ने बुधवार को ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत में बताया कि प्राणिक हीलिंग एक पूरक बिना छुएं जीवन क्षमता को बढ़ाकर हमारी शारीरिक मानसिक एवं मनौवैेज्ञानिक अव्यवस्थाओं को दूर करने की सहायक विधि है। इससे शारीरिक और मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है। शरीर के तेज में वृद्धि होती है। आन्तरिक शान्ति का अनुभव होता है।
प्राणिक ​हीलिंग से उपचार 
प्राणिक हीलिंग से हृदय सम्बंधी परेशानी,उच्च रक्तचाप,पाचन सम्बंधी समस्याओं का समाधान, कंठ संबंधी विकार, मधुमेह, श्वांस संबधी उपचार, अवसाद, नशे की लत,आदि का इलाज होता है।
स्वयं भी बने प्राणिक हीलर
स्वयं भी प्रशिक्षण के बाद प्राणिक हीलर बन सकते है। प्राणिक हीलर अपने रचनात्मकता से जन सामान्य के समस्याओं और विकार का समाधान कर सकता है। डॉ. दिनेश राय ने बताया कि योग विद्या प्राणिक हीलिंग फाउन्डेशन ट्रस्ट इस दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।

 


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