सेना कमांडरों का सम्मेलन कोरोना की दूसरी लहर ने रद्द कराया ​​

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एलओसी और एलएसी पर भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के बारे में होनी थी चर्चा  जरूरत पड़ने पर युद्ध की स्थिति के लिए तैयार रहने की बननी थी रणनीति 



नई दिल्ली, 16 अप्रैल (हि.स.)। कोरोना की दूसरी लहर की वजह से सेना कमांडरों का सम्मेलन रद्द कर दिया गया है। 26 से 30 अप्रैल तक होने वाले इस सम्मेलन में सेना प्रमुख और उप प्रमुखों के अलावा 6 ऑपरेशनल या क्षेत्रीय कमांड के कमांडर और 1 प्रशिक्षण कमांड को शामिल होना था। अब यह सम्मेलन संभवतः मई में आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए बाद में तारीखों का ऐलान होगा।नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान के साथ जारी संघर्ष विराम के मुद्दे और चीन सीमा (एलएसी) पर भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा किये जाने के मद्देनजर सेना कमांडरों का यह सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
 
उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के बीच ​10 अप्रैल को ​13 घंटे चली 11वें दौर की सैन्य वार्ता में एलएसी के साथ गोगरा, डेप्सांग और हॉट स्प्रिंग क्षेत्रों से विस्थापन प्रक्रिया पर फिलहाल कोई सहमति नहीं बन पाई है। इसके बावजूद दोनों ​​पक्ष मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल के अनुसार बकाया मुद्दों को तेजी से सुलझाने और किसी भी तरह की नई घटनाओं से बचने पर सहमत हुए हैं। भारतीय पक्ष​ इन विवादित बिंदुओं पर शीघ्र विघटन की उम्मीद कर रहा है​​​।​​​ पूर्वी लद्दाख सेक्टर में दोनों पक्ष पहले ही सबसे महत्वपूर्ण पैन्गोंग झील क्षेत्र से विस्थापित हो चुके हैं लेकिन अभी भी आगे के स्थायी स्थानों पर विस्थापन होना बाकी है। भारतीय सेना ने पाकिस्तान ​से संघर्ष विराम की सहमति बनने के बाद नियंत्रण रेखा (​​एलओसी) पर​​ ​भी अपना ध्यान केंद्रित किया है​ 
 
इसी सम्मेलन में ​सेना के कमांडरों को​ ​फरवरी में सैन्य संचालन निदेशक (डीजीएमओ) के बीच हुए समझौते के बाद युद्धविराम के सख्त पालन पर चर्चा करनी थी। ​​संघर्ष विराम​ के बाद मार्च के महीने ​से एलओसी​ पर दोनों पक्षों की बड़ी बंदूकें पूरी तरह से मौन बनी हुई हैं। मार्च में एलओसी के पार से घुसपैठ की कोशिशें भी नहीं हुई हैं। दक्षिण​, ​पश्चिमी और मध्य थल सेना के कमांडर-इन-चीफ की बैठक में इस बात पर भी चर्चा होनी थी कि जरूरत पड़ने पर युद्ध की स्थिति के लिए खुद को कैसे तैयार किया जाए।
 

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