अमेरिका तैयार चीन के बेल्‍ट एंड रोड प्रॉजेक्‍ट कड़ी टक्‍कर देने को , बाइडेन ने दिया सुझाव

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वॉशिंगटन 29 मार्च (हि.स.)। चीन के अरबों डॉलर के ड्रीम प्रॉजेक्‍ट बेल्ट एंड रोड परियोजना को अमेरिका कड़ी टक्‍कर देने जा रहा है। अमेरिका के राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने उन लोकतांत्रिक देशों को फडिंग करने को कहा है, जिन देशों को चीन अपने कर्ज के जाल में फंसाकर अनुचित समझौते कर गलत तरीके से फायदा उठा रहा है। बाइडेन ने यह प्रस्‍ताव ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ फोन पर बातचीत के दौरान दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यह सुझाव ऐसे समय पर दिया है जब चीन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और चीन के बीच शिंजियांग में उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्‍याचार को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। बाइडेन ने ब्रिटिश पीएम से बात करने के बाद कहा, मैंने सुझाव दिया है कि लोकतांत्रिक देशों की मदद के लिए आवश्‍यक पहल होनी चाहिए ताकि दुनिया के उन समुदायों की मदद की जा सके जिन्‍हें वास्‍तविक मदद की जरूरत है। बाइडेन का इशारा चीन के बेल्‍ट एंड रोड प्रॉजेक्‍ट के विकल्‍प की ओर था।

चीन ने बेल्‍ट एंड रोड परियोजना के जरिए दुनियाभर में लोन बांटा है। इससे क्षेत्रीय ताकतों ओर पश्चिमी देशों की जहां चिंता बढ़ गई है, वहीं ड्रैगन का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। चीन ने दुनिया के कई देशों को सड़क, रेलवे, बांध और बंदरगाह बनाने में मदद की है। चीन की इस परियोजना के कर्ज के जाल में श्रीलंका जैसे छोटे देश फंसते जा रहे हैं। श्रीलंका को अपना हंबनटोटा बंदरगाह चीन को 99 साल के लीज पर देना पड़ा है।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2013 में सत्ता में आने के बाद अरबों डॉलर की इस परियोजना की शुरुआत की थी। यह परियोजना दक्षिणपूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को सड़क एवं समुद्र मार्ग से जोड़ेगी। भारत ने बीआरआई की सीपीईसी परियोजना को लेकर इसका बहिष्कार किया है। दरअसल 60 अरब डॉलर से तैयार होने वाला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरेगा। भारत इसका विरोध कर रहा है। यह बीआरआई की प्रमुख परियोजना है। चीन ने बीआरआई  के तहत पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को 80 करोड़ डॉलर की आनुमानित लागत से विकास कर रहा है।

 


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