पंजाब भाजपा का शिष्ट मंडल राज्यपाल से मिला पार्टी विधायक को निर्वस्त्र करने के विरोध में

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सरकार बर्खास्त करने की मांग, रोषस्वरूप अर्धनग्न हुए कुछ भाजपा नेतामुख्यमंत्री के निवास के समक्ष दिया धरना 



चंडीगढ़, 28 मार्च (हि.स.)। पंजाब के मलोट शहर में भाजपा विधायक अरुण नारंग पर शनिवार को किसानों के किये हमले और उन्हें निर्वस्त्र करने की घटना के विरोध में रविवार को पंजाब भाजपा के नेताओं का एक शिष्टमंडल प्रदेश के राज्यपाल वीपी सिंह बदनोर से मिला।
शिष्टमंडल ने घटना को लेकर राज्यपाल बदनोर से अपना रोष जताया और राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर विरोध व्यक्त किया। इसके बाद भाजपा नेताओं में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के निवास के समक्ष धरना भी दिया। दूसरी और पंजाब के राज्यपाल ने भाजपा विधायक पर हुए शर्मनाक हमले की निंदा की। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से इस प्रसंग में कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है।
राज्य भाजपा प्रमुख अश्विनी शर्मा और केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश के नेतृत्व में भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इसमें भाजपा कार्यकर्ताओं-नेताओं पर बढ़ते हमलों और कांग्रेस की भूमिका की बात कही गई है। प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने और राज्य में कानून व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
राज्यपाल ने राज्य के मुख्यमंत्री को फोन किया और इस मामले पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारी किसी पर भी इस तरह के गैरकानूनी और हिंसक हमले की अनुमति नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने इन मामलों पर की जा रही कार्रवाई पर राज्य सरकार से रिपोर्ट भी मांगी।
राज्यपाल को ज्ञापन देने के बाद भाजपा विधायकों ने पार्टी विधायक पर हमले के विरोध में सीएम अमरिंदर के घर के बाहर धरना भी दिया। कुछ भाजपा नेताओं ने विरोध स्वरूप में अपनी शर्ट भी उतार दी। उन्होंने राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से विफल हो गई है। अश्वनी शर्मा ने घटना की निंदा करते हुए कहा, ‘क्या विपक्षी पार्टी (भाजपा) को अपने विचार रखने का कोई अधिकार नहीं है।’ प्रदेशाध्यक्ष शर्मा ने कहा कि भाजपा की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कभी लोकतंत्र को इस तरह शर्मसार होते नहीं देखा। उन्होंने प्रश्न किया कि विधायक अरुण नारंग का क्या दोष था? वह राज्य सरकार की विफलता को उजागर करने के लिए वहां गए थे।
गौरतलब है कि पंजाब के भाजपा नेता पिछले कई महीनों से केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध का सामना कर रहे हैं। यहां तक कि विधानसभा में कांग्रेस समेत अन्य भाजपा विरोधी पार्टियों के विधायकों ने भाजपा विधायक अरुण नारंग को राज्यपाल के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने ही नहीं दिया था।

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