विधानसभा कमेटी कौशल प्रशिक्षण के नाम पर एजेंसी के अधिक पैसा लेने की जांच करेगी

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पटना, 19 मार्च (हि.स.)।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना ‘सात निश्चय’ के तहत कुशल युवा कार्यक्रम में नॉलेज पार्टनर के तहत चुनी गई कंपनी ने बगैर काम के ही पेमेंट ले लिए। बिहार विधानसभा बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान शुक्रवार को सदन में कौशल प्रशिक्षण प्रोग्राम के नाम पर एजेंसी की ओर से अधिक पैसा वसूली का मामला उठा। इसके बाद सदन को आश्वस्त करते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की कि कुशल युवा कार्यक्रम के तहत कौशल प्रशिक्षण में प्रशिक्षण एजेंसी की ओर से अधिक पैसा लेने की जांच विधानसभा की समिति करेगी।

नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना में आखिर किसकी लापरवाही से बगैर काम किए एमकेसीएल को पेमेंट दे दिया गया। यह सवाल विधानसभा में काफी देर तक चलता रहा। भाजपा विधायक शैलेंद्र और अरुण शंकर प्रसाद समेत अन्य सदस्यों की तरफ से इस मामले पर ध्यानाकर्षण सूचना लाई गई थी। सरकार की तरफ से श्रम संसाधन मंत्री जिवेश कुमार मिश्रा ने सदन को जानकारी दी कि कंपनी को 24 लाख से थोड़ी ज्यादा रकम पेमेंट के तौर पर की गई है लेकिन भाजपा के विधायक आरोप लगा रहे थे कि इसमें करोड़ों का खेल हुआ है।

सदन में इस मामले पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्य भी उठ खड़े हुए। राजद के विधायक अवध बिहारी चौधरी और भाई बिरेंद्र ने विधानसभा की समिति से मामले की जांच कराने की मांग रखी। आखिरकार विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में हुए हंगामे को देखते हुए विधानसभा की कमेटी बनाकर इस मामले की जांच कराने की घोषणा कर दी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत सात निश्चय कार्यक्रम में से एक युवा कौशल कार्यक्रम का संचालन होता है। 2016 से चलाए जा रहे कुशल युवा कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी जिले में कुशल युवा प्रशिक्षण कार्यक्रम कौशल विकास केंद्र पर आयोजित की जाती है।

कुशल युवा कार्यक्रम के दौरान न्यूनतम 10वीं पास युवाओं को हिंदी, अंग्रेजी भाषा ज्ञान, व्यवहारिक ज्ञान और कंप्यूटर बेसिक ज्ञान का प्रशिक्षण दिया जाता है, जो युवाओं के रोजगार में अहम भूमिका निभाता है। महाराष्ट्र की एमकेसीएल कंपनी को कुशल युवा कार्यक्रम के लिए पोर्टल बनाने का काम 2016 में दिया गया था। उसने 2017 से लेकर 2020 तक का पेमेंट बगैर काम के ही ले लिया। 2016 में सरकार और एमकेसीएल के बीच अनुबंध  हुआ था, लेकिन 2020 में पोर्टल बनाने का काम पूरा नहीं किया गया।

 


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