छलका पूर्व डीजीपी का दर्द एमएलसी मनोनीत नहीं होने पर

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गुप्तेश्वर पाण्डेय ने कहा, जल्द लूंगा कोई बड़ा फैसला  



पटना, 18 मार्च (हि.स.)। राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद् में मनोनित किए गए 12 विधान पार्षदों में जगह नहीं मिलने पर बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडेय का दर्द आखिरकार बाहर आ ही गया। पत्रकारों से बात करते हुए बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने कहा कि अभी वह सभी मसलों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं और जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेंगे।

अपने कार्यकाल के छह महीने पहले ही ऐच्छिक सेवानिवृति (वीआरएस) लेकर गुप्तेश्वर पांडेय सत्तारूढ़ जदयू में शामिल हो गए थे। जिसके बाद यह कयास लगे जा रहे थे कि जदयू उन्हें विधानसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाएगी और उन्हें टिकट देगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जिसके बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि पार्टी उन्हें राज्यपाल कोटे से मनोनयन वाली सीट से  विधान परिषद् भेज सकती है। परन्तु इस बार भी पार्टी ने उन्हें कोई तरजीह नहीं दी। जबकि उनके साथ ही सेवानिवृत हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार को न केवल गोपालगंज की भोरे विधानसभा सीट से टिकट दिया,बल्कि उनके चुनाव जीतने के बाद उन्हें राज्य के मद्य निषेध विभाग का मंत्री भी बना दिया। जिसके बाद अब पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय का दर्द छलकने लगा है।

गुप्तेश्वर पांडेय ने यह साफ कर दिया कि वह जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेंगे। जिसके बाद अब राजनीतिक अटकले लगनी तेज हो गई है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मुम्बई में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत मामले में मुम्बई पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले गुप्तेश्वर पाण्डेय वर्ष 2009 में भी ऐच्छिक सेवानिवृति लेकर चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। लेकिन जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो अपनी ऐच्छिक सेवानिवृति वाले आवेदन को वापस लेकर फिर से पुलिस की सेवा में आ गए और बाद के दिनों में बिहार के पुलिस महानिदेशक बने।

 


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