अमेरिका की सख्ती क्वाड बैठक से पहले

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वॉशिंगटन, 12 मार्च (हि.स.)। दक्षिणी चीन सागर में चीन की दादागीरी को रोकने के लिए अमेरिका ने कमर कस ली है। अपने पड़ोसियों को लगातार परेशान करने वाले चीन से हर कोई नाराज है। इस बीच भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के गठबंधन वाले क्वाड की बैठक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में गठबंधन की मजबूती और अन्य मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, अमेरिका की जो बाइडेन सरकार चीन के खिलाफ लगातार सख्ती दिखा रही है।

अमेरिका के प्रभावशाली सीनेटरों ने सीनेट में कई प्रस्ताव पेश कर दक्षिण चीन सागर  में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के लिए चीन की आलोचना की है। साथ ही बीजिंग की आर्थिक गतिविधियों से निपटने के लिए भी प्रस्ताव पेश किया है जिससे वैश्विक बाजार के साथ-साथ अमेरिकी व्यवसाय को नुकसान होता है।

सीनेटर रिक स्कॉट, जोश हाउले, डैन सुलीवान, थॉम टिलीस और रोजर विकर ने बुधवार को प्रस्ताव पेश किया। अमेरिका-चीन की वैध समुद्री सीमा के परे उसकी विस्तारवादी नीतियों को अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, ‘इस आक्रामक एवं अवैध कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। मैं यह प्रस्ताव पेश करते हुए फख्र महसूस करता हूं कि अमेरिका की नौसेना और तटरक्षक बल हमारी स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए काम कर रहे हैं और महासचिव शी को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनका आक्रामक रवैया जारी नहीं रह सकता।

कल पहली बार चर्चा करेंगे 4 देशों के प्रमुख

गौरतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन और जापान पीएम योशिहिडे सुगा शुक्रवार को क्वाड मीटिंग में शामिल होने जा रहे हैं।  खास बात है कि चारों देशों के क्वाड समूह की पहली बैठक होगी. चारों लीडर वर्चुअल तरीके से इस चर्चा में शामिल होंगे. माना जा रहा है कि इस मुलाकात में चारों राष्ट्रों के बीच कोरोना वायरस वैक्सीन और सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

 


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