अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी मुख्यालय में “भारतीय परिवार एवं समाज के विकास में महिलाओं का योगदान” विषय पर वक्तव्य का आयोजन 

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नई दिल्ली, 08 मार्च:अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में दिनांक 8 मार्च 2021 को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी मुख्यालय में “भारतीय परिवार एवं समाज के विकास में महिलाओं का योगदान” विषय पर वक्तव्य का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. रामशरण गौड़ की अध्यक्षता में आयोजित किया गया तथा मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी कार्यान्वयन निदेशालय की निदेशक प्रो. कुमुद शर्मा उपस्थित रहीं। दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के सदस्य श्री सुभाष चंद्र कंखेरिया भी कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्रीमती कीर्ति दीक्षित द्वारा सरस्वती वंदना एवं कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।

प्रो. कुमुद शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली सुश्री विनेश फोगाट को सम्मान देते हुए कहा कि महिलाओं की शक्ति व पराक्रम की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय देवियों में भी लक्ष्मी-धन का, पार्वती-शक्ति व बल का तथा सरस्वती-ज्ञान का प्रतिनिधित्व करते हुए महिला सशक्तिकरण का एक स्वरूप प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने बताया कि विदेशों में महिला सशक्तिकरण हेतु एक पूरे सिद्धांत को गढ़ने की आवश्यकता पड़ी। इसमें मातृत्व और पत्नित्व दो अहम मुद्दे रहे हैं। भारतीय स्त्रियों को किसी भी विदेशी सैद्धांतिकी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनका जीवन ही इस अस्मियता की पराकाष्ठा है। उनका शौर्य और पराक्रम सदैव ही सम्माननीय है। उन्होंने आधुनिक भारतीय सामाजिक परिपेक्ष्य की बात करते हुए कहा कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों की चकाचौंध में रहने वाली सभी महिलाओं की अपनी चिंताएं और भय हैं। प्राचीनकाल में भारतीय महिलाएं अपने बौद्धिक एवम् शारीरिक कौशल से पुरुषों को युद्ध में हरा कर इतिहास रच चुकी हैं। आज महिलाओं को आवश्यकता है तो अपने सामर्थ्य और कौशल को पहचानने की व आत्मबोध की। उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं के भीतर सृष्टि, दृष्टि,शक्ति और युक्ति जैसे गुण विद्यमान हैं। अपने अंदर के इन गुणों का सही उपयोग कर महिलाएं सही दिशा की ओर बेबाकी से बढ़ सकती हैं।

श्री सुभाष चन्द्र कन्खेरिया ने सृष्टि का सृजन करने वाली मातृ शक्ति को नमन कर अपना वक्तव्य प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि हमारी प्रथम शिक्षिका हमारी माँ ही होती है। महिलाओं की भूमिका को समाज द्वारा कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हमें अपने भीतर अपनी सृजनहार, अन्नपूर्णा के लिए सम्मान भावना को सदैव जागृत रखना चाहिए एवम् सभी महिलाओं हेतु समान रूप से एक सकारात्मक दृष्टि रखते हुए उनके सम्मान का संकल्प करना चाहिएI

डॉ. रामशरण गौड़ ने अपने अध्यक्षीय भाषण का प्रारंभ करते हुए सभागार में उपस्थित सभी महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में महिलाएं पुरुष से अधिक सशक्त रहीं हैं। वैदिक काल से लेकर आठवीं शताब्दी तक महिलाएं अपने विद्वत, शौर्य और पराक्रम द्वारा पुरुषों से आगे ही रही। परन्तु भारत में आक्रान्तियों के कारण इस स्थिति में बदलाव आया। भारत में  सदैव ही महिलाएं सम्माननीय रही हैं। वे करुणा, दया और सहनशीलता का स्वरूप हैं। डॉ. रामशरण गौड़ ने भारतीय परिवार और समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका, महिलाएं कैसे समाज में बदलाव ला सकती हैं,वर्तमान में एक महिला को अपने दैनिक जीवन में कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार में चर्चा कीI

वक्तव्य के पश्चात दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा श्रोताओं से भारतीय इतिहास में सुप्रसिद्ध महिलाओं के जीवन एवं सामाजिक विकास में उनके योगदान से जुड़े प्रश्न पूछे गए।

अंत में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की सहायक पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी श्रीमती कृति सोनी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन तत्पश्चात राष्ट्रगान के साथ इस प्रेरणात्मक एवम् ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का समापन किया गया।

 

 


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