युद्ध क्षमता नौसेना प्रमुख ने ‘ट्रोपेक्स-21’ में देखी

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ऑपरेशनल कमांडरों ने दी नौसेना के ​युद्ध संबंधी अवधारणाओं की जानकारी  ​युद्धाभ्यास ​में ​सेना, वायु सेना और तटरक्षक ने भी किया क्षमताओं का प्रदर्शन  



नई दिल्ली, 20 फरवरी (हि.स.)। नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने हाल ही में संपन्न हुए थिएटर लेवल ऑपरेशनल रेडिएशन एक्सरसाइज (ट्रोपेक्स-21) ​की समीक्षा की। नौसेना प्रमुख ने सभी ​​ऑपरेशनल कमांडरों के साथ भारतीय नौसेना के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करने के उद्देश्य​​ से ​हुए ​​​युद्धाभ्यास ​में नौसेना की युद्ध क्षमता का परीक्षण किया​। इसमें भारतीय नौसेना के तीनों कमान, पोर्ट ब्लेयर में ट्राई-सर्विस कमान, ​​भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और तटरक्षक बल शामिल थे। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास के दौरान सीखे गए सबक से योजनाकारों को नौसेना की संरचनात्मक ज़रूरतों, ​​युद्ध संबंधी अवधारणाओं का सटीक आकलन हो सकेगा।
नौसेना प्रवक्ता के अनुसार यह अभ्यास हिन्द महासागर के विशाल भौगोलिक ​और ​उसके सहायक जल क्षेत्र में फैला हुआ था, जिसमें युद्धाभ्यास के दौरान पैदा स्थितियां हिन्द महासागर क्षेत्र की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के इर्द-गिर्द केंद्रित थीं। भारतीय नौसेना के इस अभ्यास का उद्देश्य कम तीव्रता वाली उप-पारंपरिक चुनौतियों से निपटने से लेकर उच्च स्तरीय पारंपरिक खतरों तक संघर्ष के समस्त आयामों पर खुद का मूल्यांकन करना था। जटिल एवं अनेक प्रकार के ख़तरे वाले परिदृश्य में युद्धपोतों, विमानों और पनडुब्बियों से मिसाइलों और टारपीडो की लाइव कॉम्बैट फायरिंग भी की गई। ट्रोपेक्स-21 का उद्देश्य नौसेना की आक्रामक रक्षा क्षमताओं का परीक्षण करना, समुद्री क्षेत्र में राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना और हिन्द महासागर क्षेत्र में स्थिरता और शांति को बढ़ावा देना भी ​था​।
ट्रोपेक्स के दौरान शांतिकाल से लेकर युद्ध की स्थिति तक नौसेना के बदलाव का भी परीक्षण किया गया। ट्रोपेक्स युद्धाभ्यास के दौरान सीमावर्ती युद्धपोतों, विमानों और पनडुब्बियों से मिसाइलों, टारपीडो और रॉकेट सहित कई ‘ऑन-टारगेट’ आयुध क्षमताओं को देखा गया। भारतीय नौसेना ने घातक मारक क्षमता का प्रदर्शन करके हिन्द महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी के समुद्री हमलों को अंजाम देने की क्षमता की पुष्टि की, जो सामरिक चुनौतियों का सामना करने और सुरक्षित समुद्री तटों को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण क्षमता है। अपने युद्ध कौशल को निखारने, व्यापक हिन्द महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की दिशा में अपनी भूमिका को मजबूत करने और ‘कॉम्बैट रेडी, विश्वसनीय और बलों को एकजुट करना भी इस अभ्यास का उद्देश्य है।
पहले चरण में भारतीय नौसेना ने 12-13 जनवरी 2021 को भारत के पूरे समुद्र तट और द्विपीय क्षेत्रों के साथ तटीय रक्षा अभ्यास ‘सी विजिल’ का आयोजन किया था। इस अभ्यास का उद्देश्य देश के तटीय रक्षा सेटअप का परीक्षण एवं सत्यापन करना था, जिसे मुंबई में 26/11 को हुए आतंकवादी हमलों के बाद पूरी तरह से नया रूप प्रदान किया गया था। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, 13 तटवर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की समुद्री पुलिस के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र के अन्य हितधारकों की बड़ी पैमाने पर भागीदारी देखी गई। इस अभ्यास से सामने आने वाली बहुमूल्य सीख को देश के तटीय रक्षा ढांचे को और बेहतर बनाने के लिए मौजूदा प्रक्रियाओं में शामिल किया जा रहा है।
अभ्यास ‘सी विजिल’ के बाद बड़े पैमाने पर सेना​​ के तीनों अंगों की भागीदारी से त्रि-सेवा संयुक्त जल-थल-नभ युद्धाभ्यास एम्फ़ेक्स-21 21-25 जनवरी से अंडमान निकोबार द्वीप समूह में आयोजित किया गया था। तीनों सेनाओं के इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य अपने द्वीप क्षेत्रों की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और सेना के तीनों अंगों के बीच सामरिक तालमेल और संयुक्त युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने के लिए भारत की क्षमताओं को परीक्षित और सत्यापित करना था।

 


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