उत्तराखंड आपदा में 197 अभी लापता अबतक 20 लोगों के शव मिले

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तपोवन पॉवर प्रोजेक्ट की टनल में 130 मीटर अंदर तक पहुंची रेस्क्यू टीमः मुख्यमंत्री



देहरादून, 08 फरवरी (हि.स.)। उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को ग्लेशियर टूटने के बाद मलबे से अबतक 20 शव बरामद हुए हैं और 197 लोग अब भी लापता हैं। राज्य सरकार ने इसकी पुष्टि की है। उधर, आपदा प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए आज शाम को देहरादून से रवाना हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत तपोवन पहुंच गए हैं। जहां उन्होंने पॉवर प्रोजेक्ट की टनल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में अधिकारियों से जानकारी भी ली। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू टीम के सदस्य टनल में 130 मीटर अंदर तक पहुंच चुके हैं।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सोमवार शाम पांच बजे आधिकारिक वक्तव्य में बताया कि इस आपदा के बाद चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अबतक 20 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा अब भी कम से कम 197 लोग लापता हैं। इनमें रैणी गांव के 6, तपोवन ऋत्विक कम्पनी के 115, करछौ के 2, रिंगी गांव के 2, ऋषिगंगा कम्पनी के 46, ओम मैटल के 21, एचसीसी के 3 और तपोवन गांव के 2 लोग हैं। इसके अलाव टनल में तकरीबन 25 से 35 लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिनको सकुशल निकालने की उम्मीद के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
एनटीपीसी से 12 लोगों को रेस्क्यू टीम ने सकुशल बचा लिया है। छह लोग घायल हैं। इस आपदा में कुल पांच पुल ध्वस्त हुए हैं, जिनमें लोक निर्माण विभाग के 2, ग्रामीण निर्माण विभाग का 1, बीआरओ का 1 और एनटीपीसी का 1 पुल है। शिवालिक बीआरओ, रैणी गांव, जोशीमठ के चीफ इंजीनियर एएस राठौर का कहना है कि कल यहां 90 मीटर का एक पुल था जो बह गया है। जैसे ये आपदा हुई तुरंत बीआरओ एक्शन में आ गया। हम दिन-रात मशीनों द्वारा कोशिश कर रहे हैं, ताकि यहां यातायात सुचारू हो सके।
इस आपदा में 13 गांवों की विद्युत आपूर्ति लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी लेकिन 11 गांवों की आपूर्ति बहाल कर दी गई है। मुराड़ा और पैंग गांवों में करीब 3 किमी लम्बी 11 केवीए लाइन अभी भी क्षतिग्रस्त है, जिनके खम्भे, पोल स्ट्रक्चर, ट्रांसफार्मर आदि क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनकी जांच पड़ताल का कार्य प्रगति पर है।
इलाके में रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी है। इनमें एसडीआरएफ के 70 जवान, एनडीआरएफ के 129, आईटीबीपी के 425 जवान, एसएसबी की एक टीम तथा सेना के 124 जवानों की टीम है, जिनमें नेवी के 16, एयर फोर्स के 2 तथा हेप्टीस के 3 जवान हैं। इलाके में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सेना की 2 मेडिकल टीम और 2 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 4 मेडिकल टीमें तैनात की हैं, जिनमें से रैणी गांव में 1 और तपोवन में 3 टीमें हैं। इसके अलावा 4 एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवा (108) की 5 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं।
इसके अलावा फायर विभाग के 16 फायर मैन, राजस्व विभाग के 20 कार्मिक, दूरसंचार विभाग के 7 कार्मिक और सिविल पुलिस के 26 कार्मिक तैनात किए गए हैं। वायुसेना द्वारा एनडीआरएफ की टीम को घटना स्थल पर पहुंचाया गया। रेस्क्यू अभियान के लिए स्टैंड बाई कार्मिक और संसाधन की भी व्यवस्था की गई है। इनमें आईटीबीपी के 400 (मातली, महीडांडा और देहरादून), सेना के 220, सेना के चॉपर 3 (जोशीमठ), स्वास्थ्य विभाग की 4 मेडिकल टीम एवं 4 एम्बुलेंस, 108 सेवा की एक एम्बुलेंस तथा 39 फायर मैन शामिल हैं।
इस बीच आपदा प्रभावित इलाके के दौरे पर निकले मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत तपोवन पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि तपोवन में पॉवर प्रोजेक्ट की टनल के भीतर आईटीबीपी, सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू कार्य में जुटी हुई हैं। इसकी बड़ी टनल में भारी मात्रा में मलबा और गाद है, जिसे निकालने के लिए आज जेसीबी काे इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू टीम टनल के अंदर 130 मीटर तक पहुंच गई है और अगले 2-3 घंटे में उसके टी प्वाइंट तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन अत्यंत सुरक्षित तरीके से चलाया जा रहा है, क्योंकि टनल में लोग फंसे हुए हैं।

 


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