हाई ब्लड प्रेशर की समस्या देश में 10 वयस्कों में से 3 को

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डॉ. हर्षवर्धन ने राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग निगरानी सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की



नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। केन्द्रीय स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोमवार को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान और अनुसंधान केन्द्र-एनसीडीआईआर के स्थापना दिवस समारोह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अध्यक्षता की। इस मौके पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने गैर-संचारी रोगों से संबंधित जोखिम कारकों और स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट तथा कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, दौरों (आघात) के लिए टेली-मेडिसिन के उपयोग के ढांचे को जारी किया।
डॉ. हर्षवर्धन ने महामारी पर काबू पाने में आईसीएमआर के वैज्ञानिकों के अद्वितीय योगदान के लिए देश की ओर से उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 कोविड के कारण हुए कष्ट और निराशा की याद दिलाता है। यद्यपि इसने आशा का संचार भी किया, यह विज्ञान और वैज्ञानिकों का वर्ष भी था। उन्होंने न केवल स्वदेशी जांच किट बनाकर किट की कमी को दूर किया अपितु जांच किट को विश्व में निर्यात करने की स्थिति में भी देश को लाकर खड़ा कर दिया। आईसीएमआर विश्व में पहला ऐसा संगठन था, जिसने वायरस और इसके बदलते हुए स्वरूप को आइसोलेट किया और सक्षम दवा लक्ष्यों की बायोरिपोजेटरी विकसित की। भारत अब वैक्सीन बना रहा है और कई देशों को इसकी आपूर्ति कर रहा है। इनमें से एक वैक्सीन पूरी तरह भारत में विकसित की गई है।
उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के लिए समूचे वैज्ञानिक समुदाय को श्रेय दिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग निगरानी सर्वेक्षण जारी करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह कैंसर को भी ट्रैक करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम देश के लिए बहुमूल्य कैंसर निगरानी औजार है। कैंसर पर काबू पाने की कार्रवाई से विश्वसनीय डेटा मॉनिटरिंग करने में सुविधा मिलती है। इससे आयुष्मान भारत-स्वास्थ्य एवं आरोग्य केन्द्रों में गैर-संचारी रोगों की बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग के माध्यम से असामान्य कैंसर की स्क्रीनिंग में मदद मिलती है। उन्होंने स्वास्थ्य अनुसंधान सचिव से बेहतर स्वास्थ्य निष्कर्ष के लिए सभी प्रकार के कैंसर की सूचना देना अनिवार्य बनाने हेतु विधायी कार्रवाई किए जाने का पता लगाने को कहा।
उल्लेखनीय है कि एनएनएमएस सर्वे 2017-18 के दौरान कराया गया था। इस सर्वे का उद्देश्य राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग निगरानी ढांचे और राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग कार्रवाई योजना से संबंधित प्रमुख संकेतकों (जोखिम कारक, चयनित, गैर-संचारी रोग और स्वास्थ्य व्यवस्था कार्रवाई) पर विश्वसनीय बेसलाइन डेटा एकत्र करना था। यह अपनी किस्म का पहला व्यापक सर्वे है, जिसमें मानकीकृत औजार और तरीके इस्तेमाल किए गए हैं और देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रह रहे 15 से 69 वर्षों के आयु वर्ग की महिलाओं और पुरुषों को कवर किया गया है। सर्वे में देश भर के 11 प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से 28 राज्यों में 384 जिलों से 600 प्राथमिक सैम्पलिंग के राष्ट्रीय सैम्पल को कवर किया गया है।
इस सर्वे के मुताबिक तीन वयस्कों में से एक और पुरुषों की एक चौथाई संख्या से अधिक ने पिछले 12 महीनों में क्रमशः किसी प्रकार के तम्बाकू का इस्तेमाल किया और अल्कोहल का सेवन किया, नमक की औसत दैनिक खपत आठ ग्राम थी। पांच वयस्कों में से दो से अधिक और चार किशोरों में से एक अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि कर रहे थे। चार वयस्कों में से एक से अधिक और 6.2 प्रतिशत किशोर का वजन अधिक था या मोटे थे। दस वयस्कों में से लगभग तीन का बढ़ा हुआ रक्तचाप था और 9.3 प्रतिशत का ब्लड ग्लूकोज बढ़ा हुआ था। पांच वयस्कों में से दो के गैर-संचारी रोगों के लिए अधिक जोखिम कारक थे।
इस अवसर पर आईसीएमआर के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान सचिव प्रोफेसर बलराम भार्गव, संयुक्त सचिव अनु नागर, निदेशक डॉ. आर.एस. ढालीवाल, डॉ. समीरन पांडा और डॉ. रजनीकांत उपस्थित रहे। आईसीएमआर-एनसीडीआईआर के निदेशक डॉ. प्रशांत माथुर ने डिजिटल माध्यम से भाग लिया।

 


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