गोरखपुर : धान-गेहूं खरीद में दोषी आठ सचिवों के खिलाफ जांच तेज

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गोरखपुर, 16 जनवरी (हि.स.)। बिचौलियों से मिलकर किसानों से गड़बड़ी करने के आरोपी 8 सचिवों और उनकर सहयोगियों पर भारी पड़ने लगा है। पिछले तीन साल में गड़बड़ी करने वाले सचिवों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। जिला प्रशासन से निर्देश मिलने के बाद गोरखपुर पुलिस ने पिछले तीन साल के दौरान गड़बड़ी करने वाले सचिवों समेत आठ के खिलाफ दर्ज मामलों में जांच-पड़ताल तेज कर दी है।
बता दें कि किसानों की योजनाओं और सुविधाओं को कोई लूट न पाए इसको लेकर शासन का रुख सख्त है। अब शासन ने ऐसे सचिवों और उनके सहयोगियों पर गाज गिराने की पूरी तैयारी कर ली है। सख्ती शुरू है। शासन ने अधिकारियों से किसानों से संबंधित योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने को कहा है। यह भी संदेश दिया है कि ऐसा करने वाले अफसर-कर्मचारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई तय है। इसके साथ ही शासन ने बीते तीन साल के दौरान धान और गेहूं की क्रय केंद्रों पर खरीद के दौरान हुई गड़बड़ी का ब्यौरा मांगा है और गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश भी दिया है।
शासन की मंशा भांप गई है पुलिस
शासन की मंशा को भांपते हुए क्रय केंद्रों पर खरीद के दौरान गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ हुए एफआईआर पर गोरखपुर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। गोरखपुर के डीआईजी और एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने पिछले तीन साल में गड़बड़ी के 08 मामले ढूंढ निकाले हैं। इन मामलों में सचिवों तथा उनके सहयोगियों और कुछ अन्य के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। डीआईजी व एसएसपी ने सम्बंधित थानेदारों से दर्ज मामलों की अद्यतन स्थिति पूछ लिया है। मिली रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
अपर मुख्य सचिव की चिट्ठी ने बढ़ाई सख्ती
किसानों के हक में सेंध लगाने और उन्हें किसी न किसी बहाने चूना लगाने वालों को शासन ने संज्ञान में लिया है। अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन अवनीश कुमार अवस्थी ने जिला पुलिस प्रमुखों को पत्र भेजकर बीते तीन साल में किसानों के उत्पाद की खरीद के दौरान गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
बोले एसएसपी
इस संबंध में एसएसपी जोगेंद्र कुमार का कहना है कि संबंधित थानेदारों को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। सभी थानेदार और विवेचक इस कार्य मे जुटे हैं। गोरखपुर में 8 मामले हैं। वर्ष 2018 में चिलुआताल और सहजनवा केंद्र प्रभारियों, कैम्पियरगंज व बांसगांव में सचिव के अलावा वर्ष 2019 में शाहपुर, हरपुर बुदहट, सहजनवा तथा झंगहा में सचिव के खिलाफ मामला दर्ज है।

 


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