अब हावड़ा में बागी हुए तृणमूल नेता रथीन चक्रवर्ती

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हावड़ा, 06 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी में उथल पुथल जारी है।  के एक के बाद  तृणमूल के कई नेता पार्टी नेतृत्व के खिलाफ़ मुखर हो रहे  हैं। इसी क्रम में अब हावड़ा जिले के  तृणमूल नेता रथीन चक्रवर्ती ने  बागी तेवर दिखाये हैं।
चक्रवर्ती हावड़ा के कद्दावर नेता हैं। वह हावड़ा के पूर्व मेयर रह चुके हैं और यहां गठित बोर्ड की मियाद खत्म हो जाने के बाद राज्य सरकार की ओर से प्रशासक के तौर पर नियुक्त किये गये  थे। अब उनका एक वीडियो सामने आया है जिसमें उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि हावड़ा में पार्टी के लिए काम करना संभव नहीं हो पा रहा क्योंकि यहां गुटबाजी चरम पर है।
पार्टी छोड़ने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा है कि वह आम लोगों के हित में काम करना चाहते हैं। उसके लिए जो कुछ भी करना पड़े, करेंगे। हालांकि पार्टी में किसकी वजह से उन्हें समस्या हो रही है, इस बारे में केवल इतना कहा कि जिले में नेतृत्व का संकट है। जिनको कोई काम नहीं है वे दूसरे को भी काम नहीं करने दे रहे ।
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि हावड़ा को वंचित रखा गया है। आज तक यहां एक नए स्कूल भी नहीं बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि नगर निगम के मेयर के तौर पर जो भी वित्तीय आवंटन हुआ था उसका बेहतर इस्तेमाल किए हैं। कई जल परियोजनाओं को स्थापित किया गया है लेकिन उसके उद्घाटन में उन्हें बुलाया तक नहीं गया। बड़ा आरोप लगाते हुए रथीन ने कहा है कि शीर्ष नेतृत्व अपराधियों की बात सुनता है लेकिन उनकी बातें नहीं सुनी जा रही है। उनसे जब पूछा गया कि क्या आप भी तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़ने वाले हैं? तब उन्होंने कहा कि जितने मत हैं उतने पथ हैं। कुल मिलाकर कहें तो स्पष्ट तौर पर उन्होंने ममता बनर्जी का साथ छोड़ने की बात तो नहीं कही लेकिन संकेत दे दिया कि पार्टी तृणमूल से उनका मोहभंग हो चुका है।
 उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही उत्तर हावड़ा से विधायक और राज्य के क्रीड़ा तथा युवा कल्याण मंत्री लक्ष्मी रतन शुक्ला ने इस्तीफा दिया है। उसके बाद जिले के बाली से विधायक वैशाली डालमिया ने भी आरोप लगाया है कि यहां पार्टी की गुटबाजी की वजह से वह काम नहीं कर पा रही हैं। यहीं से मंत्री राजीव बनर्जी पहले से ही नाराज हैं और पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़ा करते रहे हैं।

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