तेलंगाना : प्रसिद्ध शुगर फ्री चावल को दुनियाभर में निर्यात के लिये राज्य सरकार उत्साहित
हैदराबाद, 05 जनवरी (हि.स.)। डायबिटिक फ्री यानी शुगर मुक्त चावल के रूप में प्रसिद्ध हो चुके तेलंगाना के सोना प्रजाति चावल को अब दुनियाभर के देशों में निर्यात के लिये राज्य सराकर उत्साहित है। मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने स्वयं इस चावल की प्रजाति की खेती करने का राज्य के किसानों से आग्रह किया था। देश के दूसरे कई राज्यों में इसकी खेती की जा रही है।
25 लाख एकड़ क्षेत्र में हो रही शुगर मुक्त चावल की खेती-
इस चावल का विकास राजेंद्र नगर में स्थित प्रोफेसर जयाशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय ने किया था। वर्तमान में इस की खेती 25 लाख एकड़ क्षेत्र में की जा रही है। यह चावल केवल तेलंगाना के लिये ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों के किसानों के लिये वरदान साबित हो रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रवीण राव और शोध प्रमुख डॉ. जगदीश्वर का कहना है की विभिन्न जनरल्स के अध्ययन करने के बाद इस बात की पुष्टि कर दी है कि इस चावल में ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम मात्रा में होता है। इन शोधकर्ताओं ने दावा किया कि अन्य राज्यों में इस चावल की खेती लगभग 10 लाख से हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में की जा रही है। इस चावल में विभिन्न प्रकार की गुणवत्ता पाई गई है। सबसे पहले इसकी खेती करने से अधिक मात्रा में चावल निकलता है। साथ ही इसकी खाद भी बेहतर रहती है। बारीक चावल खाने के इच्छुक लोग इसका उपयोग कर सकते हैं।
विवि कुलपति प्रवीण राव ने बताया कि कृषि एवं एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इस चावल का निर्यात अन्य राज्य सहित अन्य देशों में करने के प्रति बहुत ही उत्साहित है। उन्होंने बताया है कि दूसरे राज्यों पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा राजस्थान में भी इसकी खेती की जा रही है।
100 से 145 रुपये प्रति किलो बिक रहा है यह चावल-
कुलपति राव ने बतायावर्तमान में तेलंगाना में चावल के छोटे और बड़े व्यापारी बिक्री कर रहे हैं। वर्तमान में यह 100 से ₹145 प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार जिन किसानों ने अपने चावल का भंडार सुरक्षित रखा है, उन्हें बेहतर समर्थन मूल्य मिल रहा है।सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य दाम ₹45 पर कई किसानों ने अपना चावल ऊंचे दाम पर बेचा है।
