चीन ने एलएसी के लिए बदला अपना कमांडर

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जनरल झांग जुडॉन्ग को पश्चिमी थिएटर कमांड का नया कमांडर नियुक्त किया गया – इससे पहले नियुक्त किये गए कमांडर जू क्विंग के कार्यकाल में हुई थी गलवान हिंसा  



नई दिल्ली, 20 दिसम्बर (हि.स.)। चीन ने पूर्वी लद्दाख की सीमा के लिए जनरल झांग जुडॉन्ग को नया कमांडर नियुक्त किया है। चीन की सेना का यह सबसे बड़ा सैन्य कमांड है जो पूर्वी लद्दाख में भारत की पश्चिमी सीमा एलएसी के लिए जिम्मेदार है। इसके साथ ही पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की पश्चिमी थिएटर कमांड चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन, पूर्वी लद्दाख में भारत की पश्चिमी सीमा एलएसी, एलएसी से सटे तिब्बत और झिंजियांग क्षेत्र के लिए भी जिम्मेदार है। इस वर्ष भारत से टकराव शुरू होने के बाद से चीनी सेना में यह दूसरा बड़ा बदलाव किया गया है।

केंद्रीय मीडिया आयोग (सीएमसी) के अध्यक्ष राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चार सैन्य अधिकारियों को पदोन्नत किया है जिसमें झांग जुडॉन्ग भी हैं जिन्हें पश्चिमी थिएटर कमांड का कमांडर नामित किया गया है। चीनी सेना की पांच कमानों में से पश्चिमी कमान सबसे बड़ी है। जनरल झांग की पश्चिमी थिएटर में पहली बार तैनाती की गई है, इसलिए उन्हें तिब्बत या शिनजियांग के बारे में कोई पूर्व अनुभव नहीं है। उन्होंने अपना करियर पूर्वोत्तर शेनयांग सैन्य क्षेत्र (अब उत्तरी थिएटर कमान के तहत) में बिताया है। वह 2017 से सेंट्रल थिएटर कमांड के कमांडर के रूप में तैनात रहे हैं जो राजधानी बीजिंग की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की पश्चिमी थिएटर कमांड चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन, पूर्वी लद्दाख में भारत की पश्चिमी सीमा एलएसी, एलएसी से सटे तिब्बत और झिंजियांग क्षेत्र के लिए भी जिम्मेदार है।

नए नियुक्त किये गए कमांडर जनरल झांग इससे पहले सेंट्रल थिएटर कमांड में दूसरे और 2015 तक कम्युनिस्ट पार्टी में डिप्टी सेक्रेटरी थे। जनरल झांग ने प्रभावशाली जनरल झाओ ज़ोंग्की का स्थान लिया है जो इस वर्ष 65 वर्ष के होने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। वह फरवरी 2016 में पश्चिमी थिएटर का गठन होने के बाद से इस कमांड के प्रभारी रहे हैं। इस बीच चीन ने जून, 2020 के पहले सप्ताह में लेफ्टिनेंट जनरल जू क्विंग को पश्चिमी थिएटर कमांड की अपनी जमीनी सेना के लिए कमांडर नियुक्त किया था जो जनरल झाओ के ही अधीन थे। इसी के बाद 15/16 जून को गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष हुआ था जिसमें भारतीय सैनिकों ने चीनी सेना को सबक सिखाया था और 20 जवानों ने अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए शहादत दी थी।

​सेवानिवृत्त हुए जनरल झाओ 2017 ​में ​डोकलाम संकट के दौरान प्रभारी थे, जब भारत और चीन ​की सेनाएं भारत-भूटान-चीन ​ट्राईजंक्शन के पास पठार पर 72 दिन ​तक आमने-सामने रही थीं।​ इसके बाद उन्हीं के कार्यकाल में पूर्वी लद्दाख की ​​वास्तविक नियंत्रण रेखा ​पर ​मई की शुरुआत ​से गतिरोध बढ़ा और चीनी सेना ने एलएसी पार ​करके ​कई​ एकतरफा बदलाव किए। इस वर्ष ​सीमा पर गतिरोध बढ़ने के बाद से ​चीन के ​पश्चिमी थिएटर ​कमांड​ ​के नेतृत्व में ​यह दूसरा बड़ा बदलाव​ ​है। भारत और चीन जल्द ही ​कोर कमांडर स्तर ​की नौवें दौर की वार्ता करने के लिए तैयार हैं​​।​ ​भारत-चीन सीमा मामलों पर​ ​​​दोनों देशों के बीच ​शुक्रवार को हुई ​बैठक में इस बात पर सहमति बनी है​।
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भारत और चीन के बीच 06 नवम्बर को चुशूल में करीब 10 घंटे हुई 8वें दौर की सैन्य वार्ता में दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव घटाने को राजी हुए हैं। बैठक में चीन ने टकराव खत्म करने के लिए एक प्रस्ताव दिया था, जिसे भारत ने एक सिरे से खारिज कर दिया था। इस प्रस्ताव में चीन की तरफ से भी पैन्गोंग झील के दक्षिण किनारे की अहम चोटियों पर भारतीय सैनिकों की तैनाती का मसला उठाया गया। इस पर भारत के अधिकारियों ने चीन की बात यह कहकर सिरे से ख़ारिज कर दी कि ये पहाड़ियां भारतीय क्षेत्र में ही हैं, भारत ने एलएसी पार करके किसी पहाड़ी को अपने नियंत्रण में नहीं लिया है। भारत ने साफ कर दिया कि डिसइंगेजमेंट होगा तो पूरी एलएसी पर होगा। ऐसी स्थिति में चीनी सेना को पैन्गोंग झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर 4-8 के पीछे जाना पड़ता लेकिन चीनी सेना इसके लिए तैयार नहीं हुई थी। ​​


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