बॉम्बे हाईकोर्ट ने कांजुरमार्ग में मेट्रो कारशेड के निर्माण कार्य पर लगायी रोक

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मुंबई, 16 दिसम्बर (हि.स.)। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कांजुरमार्ग में चल रहे मेट्रो कारशेड के कार्य को तत्काल रोकने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई अब आगामी फरवरी में होगी, तब तक वहां पर यथास्थिति बनाए रखा जाए। पहले, इस मेट्रो कारशेड को देवेंद्र फडणवीस की सरकार के दौरान आरे कॉलोनी के जंगलों में बनाया जा रहा था, लेकिन उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य सरकार ने इसे वहां से शिफ्ट कर कांजुरमार्ग में बनाना शुरू किया था। हाईकोर्ट का यह आदेश उद्धव सरकार के लिए एक झटका माना जा रहा है।

मेट्रो कारशेड का निर्माण कार्य गोरेगांव स्थित आरे कालोनी की जमीन पर हो रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इसका निर्माण कार्य कांजुरमार्ग स्थित 102 एकड़ की जमीन पर किए जाने का निर्णय लिया था। इसके बाद मुंबई के जिलाधिकारी कार्यालय ने कांजुरमार्ग की जमीन पहले मुंबई महानगर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) और इसके बाद मेट्रो के नाम पर किए जाने की प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद मेट्रो कारशेड की ओर से कांजुरमार्ग में विभिन्न तरह के परीक्षण का काम शुरू कर दिया गया था। इसकी भनक लगते ही केंद्र सरकार और अन्य पक्षकारों ने इस जमीन पर अपना कब्जा बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन्हीं याचिकाओं पर बुधवार को जस्टिस दीपाकंर दत्ता और जस्टिस एस.जी. कुलकर्णी की बेंच ने सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील अनिल सिंह ने कहा कि जमीन के मालिकाना हक को बदलने की प्रक्रिया स्थगित की जानी चाहिए और जमीन पर निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाना चाहिए। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने हाईकोर्ट को बताया कि इस मामले में जिलाधिकारी, याचिकाकर्ताओं के सुझाव पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। एमएमआरडीए के वकील मिलिंद साठे ने हाईकोर्ट को कांजुरमार्ग में मेट्रो कारशेड बनने से होने वाले लाभ और जनता को होने वाली सुविधाओं को विस्तार से बताया। इसके बाद याचिकाकर्ता महेश कुमार गारोडिया के वकील श्याम मेहता ने हाईकोर्ट को बताया कि इस जमीन को लेकर मामला अन्य कोर्ट में लंबित है। इसलिए इस जमीन का मालिकाना हक किस तरह बदला जा सकता है। वकीलों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कांजुरमार्ग में बनने वाले कारशेड के काम को फिलहाल रोके जाने का आदेश जारी किया और मामले की सुनवाई फरवरी 2021 तक के लिए टाल दिया है।

 


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