आयुष चिकित्सक प्रतिरक्षा बूस्टर कोरोना की दवा बताकर नहीं दे सकते: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली, 15 दिसम्बर (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आयुष चिकित्सक और होम्योपैथी डॉक्टर उन दवाओं को अपने पर्चे में लिख सकते हैं जिन्हें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने मंजूरी दी है। वे किसी भी दवा को कोरोना की दवा बताकर न ही प्रचार कर सकते हैं और न मरीज को दे सकते हैं।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश जारी किया। कोर्ट ने 19 नवम्बर को कहा था कि हर किसी को कोरोना के इलाज की अनुमति नहीं दी जा सकती है। केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा था कि बताएं कि किस तरीके से और किस हद तक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से आयुर्वेद, होम्योपैथी और सिद्ध के जरिये कोरोना के इलाज की अनुमति दी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर केरल हाई कोर्ट के पिछले 21 अगस्त के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें हाई कोर्ट ने कहा था कि आयुष पद्धति से चिकित्सा करनेवाले कोरोना के इलाज के रूप में गोलियां या मिश्रण नहीं लिखेंगे बल्कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के रूप में लिखेंगे। आयुष मंत्रायल ने पिछले 6 मार्च को एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें कहा गया था कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकारें दवाओं की दूसरी पद्धतियों को अपनाने के लिए कदम उठाएंगी। इस नोटिफिकेशन के जारी होने के बाद एक वकील ने केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आयुष मंत्रालय के नोटिफिकेशन को केरल में लागू करने की मांग की।

केरल हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आयुष में डॉक्टर्स दवाओं को लिख सकते हैं लेकिन केवल प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के रूप में लिख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा था कि आयुष मंत्रालय द्वारा क्या कोई दिशा-निर्देश जारी किया गया है। इसका असर पूरे देश में होगा। हर किसी को कोरोना के इलाज की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हाई कोर्ट का फैसला सही है।

 


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