किसानों का 8 को भारत बंद, दिल्ली सील करने का ऐलान

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 शनिवार को देशभर में किसान फूंकेंगे केंद्र सरकार व कारपोरेट घरानों का पुतला  किसान संगठन बोले, कृषि कानूनों में संशोधन नामंजूर, केंद्र सरकार ले वापस



चंडीगढ़, 04 दिसम्बर (हि.स.)। कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार व किसान संगठनों के बीच गतिरोध जारी है। केंद्र सरकार के रवैये से नाराज किसानों ने 8 दिसम्बर को भारत बंद व दिल्ली सील करने का ऐलान किया है। कृषि कानूनों के विरोध में देशभर में किसान संगठनों द्वारा 5 दिसम्बर को केंद्र सरकार व कारपोरेट घरानों का पुतला फूंका जाएगा और 7 दिसम्बर को देशभर के सेना के जवान और अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी अपने मेडल लौटाएंगे। यह फैसले  शुक्रवार को सिंघु बार्डर पर आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में किसान संगठनों ने लिये।

बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य मीडिया से रूबरू हुए। भारतीय किसान यूनियन के हरेंद्र सिंह ने मीडिया को बताया कि गुरुवार को केंद्र सरकार के साथ हुई बैठक में किसानों ने दो टूक कहा कि किसानों को कृषि कानूनों में संशोधन किसी भी सूरत में मंजूर नहीं हैं। उन्होंने सरकार से लोकसभा का विशेष सत्र बुलाकर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की।
हरेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार बातचीत के दौरान 9 बिदुंओं पर संशोधन के लिए राजी हुई। खुद केंद्र सरकार ने माना कि कई बिंदुओं में खामी हैं। बातचीत के दौरान सरकार बिजली व पराली बिल को वापस लेने के लिए तैयार हुई तो एमएसपी पर कानून के लिए भी राजी हो गई थी। पहले सरकार कृषि कानूनों को बढ़िया बता रही थी लेकिन जब किसान संगठनों ने बिंदुवार खामियां गिनाईं तो सरकार ने माना कि कुछ बिंदुओं पर खामियां हैं। किसानों ने दो टूक केंद्र सरकार को कहा कि लोकसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरकार तीनों कानूनों को वापस ले।
संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में किसान संगठनों ने आंदोलन की आगामी रूपरेखा तय की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार 5 दिसम्बर को बैठक के दौरान कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी तो फिर आरपार की लड़ाई होगी। किसानों ने स्पष्ट किया कि बातचीत को लंबा करने की बजाय बैठक निर्णायक रूप में होगी। किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि किसान अब मन बना चुका है कि सरकार के साथ आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। कोविड-19 के कारण किसान दिल्ली नहीं आ सकते हैं लेकिन अपने राज्यों में कृषि कानूनों के विरोध में धरना देंगे।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि शनिवार को केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी पर फसल गारंटी की मांग रखी जाएगी। किसानों को सभी 23 फसलों पर एमएसपी की गारंटी चाहिए और तीनों कानून निरस्त होने चाहिए।
किसान नेता योगेंद्र यादव ने बताया कि पूरे देश के किसान आंदोलन के साथ जुड़ चुके हैं। कर्नाटक में किसान 7 से 15 दिसम्बर तक विधानसभा के सामने धरना देंगे। पश्चिम बंगाल में किसान शनिवार को रास्ता रोकेंगे तो महाराष्ट्र के 8 संभागों पर किसानों का निरंतर धरना चलेगा। किसानों की ओर से एक दिन के लिए देश के सभी टोल-नाकों को फ्री किया जाएगा, इसकी तिथि तय होनी बाकी है।

 


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