शाहीनबाग़, एनआरसी आंदोलनकारियों ने पंजाब के किसान नेताओं से संपर्क साधा

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दिल्ली में मुस्लिम नेताओं द्वारा दिया जा रहा है आंदोलनकारियों को सहयोग



चंडीगढ़, 28 नवम्बर (हिस)। मोदी सरकार के विरुद्ध कृषि अधिनियमों के नाम पर शुरू किये किसान आंदोलन में अब शाहीन बाग़, नक्सलवादी, खालिस्तान और एनआरसी में हारे लोगों की भागीदारी साफ़ नज़र आने लगी है। मुद्दा अब फसलों के समर्थन मूल्य का नहीं रह गया है। पंजाब से मोदी सरकार के विरुद्ध आंदोलन कर रहे लोगों के लिए अब दिल्ली की मस्जिदों में लंगर की व्यवस्था की जाने लगी है। पंजाब के मुस्लिम बहुल मलेरकोटला से जमायत -ए -इस्लामी हिन्द के नेता करमदीन मलिक का कहना था कि पंजाब के आंदोलनकारियों को हर प्रकार की सहायता मुहैया करवायी जा रही है, जबकि आंदोलन कर रही भारतीय किसान यूनीयन के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठुके का कहना था कि दिल्ली के मुसलमान नेताओं ने उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। राजनीतिक पार्टियों ने भी स्थिति का फायदा लेते हुए किसान आंदोलन में शिरकत कर है।

24 नवम्बर को ही किसानों के आंदोलन को देखते हुए मुस्लिम नेताओं ने सोशल मीडिया में मोदी सरकार विरोधी आंदोलन करने वाले लोगों की मदद के लिए दिल्ली की सहयोग करने वाली मस्जिदों में संपर्क के लिए नंबर डालने शुरू कर दिए थे। इस संवाददाता से बातचीत में विभिन्न मुस्लिम नेताओं का कहना था कि मस्जिदों में पंजाब से गए आंदोलनकारी लोग नहाने -धोने का कार्य तो कर ही सकते है, साथ-साथ कई मस्जिदों में विशेष रूप से खाने की व्वयस्था की गई है। किसान आंदोलन में लाल झंडे वालों की खुली उपस्थिति शुरू से ही हो गई थी। पंजाब से चले किसान आंदोलन में लाल झंडे वाले वो कार्यकर्ता भी शामिल हैं, जिनके न तो खेत हैं और न ही जमीन है और ऐसे नेताओं के आंदोलन में लगातार चित्र जारी हो रहे हैं। 27 नवम्बर को किसान आंदोलन फुटेज में भी खालिस्तान जैसे झंडे नज़र आये, जिन पर न तो खालिस्तान लिखा था और न ही ये किसी पार्टी के झंडे थे।

भारतीय किसान यूनियन उगराहां के वरिष्ठ उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठुके का कहना था कि अनेक स्थानों से मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने समर्थन और सहयोग का प्रस्ताव भेजा है। दिल्ली से भी पंजाब में मुस्लिम नेताओं से संपर्क कायम करके कहा जा रहा है कि आंदोलनकारी नेताओं को सहयोग के लिए दिल्ली के मुस्लिम नेताओं के नंबर दिए जाए। हालांकि इस बात को कोई भी मीडिया के समक्ष अपनी पहचान प्रकट करके कहने के लिए तैयार नहीं, परन्तु पंजाब के मुस्लिम नेताओं को शाहीन बाग़ की याद दिलवाई जा रही है। जमायत -ए -इस्लामी हिन्द के नेता करमदीन मलिक का कहना था कि उन्होंने पंजाब के किसान नेताओं को किसी जरूरत के लिए दिल्ली स्थित मुस्लिम नेताओं के कई नंबर दिए हैं, ताकि किसी जरूरत आ सके। उन्होंने बताया कि दिल्ली के मुस्लिम नेताओं के आश्वासन के उपरांत वहां कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया गया है और किसान नेताओं से लगातार संपर्क बना हुआ है और दिल्ली पहुँचने वाले किसानों के  लिए यथा संभव प्रबंध किये जा रहे हैं।

इधर पंजाब में दिल्ली कूच के साथ-साथ किसानों और वामपंथियों ने राज्य में भी 50 से अधिक स्थानों पर धरने जारी रखे हुए हैं। ये धरने टोल प्लाजों, भाजपा नेताओं के घरों के समक्ष, कॉर्पोरेट घरानों के पेट्रोल पम्पों के आगे हैं।

 


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