राष्ट्रपति ने किया डीयू के कुलपति योगेश त्यागी को निलंबित

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छूट्टी पर रहते हुए उनके सभी फैसले भी रद्द हुए पीसी जोशी जांच होने तक रहेंगे कुलपति



नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली विश्वविद्यालय में अधिकारों को लेकर चल रही लड़ाई के बीच कुलपति योगेश त्यागी को उनके खिलाफ जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश त्यागी के कामकाज को लेकर शिकायत की थी और उनके समक्ष तथ्य व दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष होने के नाते राष्ट्रपति ने संज्ञान लेते हुए उन्हें जांच होने तक निलंबित करने और उनके छूट्टी पर जाने के बाद के सभी फैसलों को रद्द करने के आदेश दिये हैं। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में कहा गया है कि कुलपति जांच पूरी होने तक अपने पद से निलंबित रहेंगे। ऐसा इसलिए किया गया है कि वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। उनके स्थान पर प्रोफेसर पीसी जोशी अभी के लिए कुलपति का कामकाज देंखेगे।

त्यागी 2 जुलाई से स्वास्थ्य समस्या के कारण दिल्ली के एम्स में दाखिल हैं और इलाज करा रहे हैं। उनकी अनुपस्थित रहने पर प्रति उप-कुलपति पीसी जोशी को 17 जुलाई को त्यागी के स्थान पर कुलपति का कार्यभार सौंपा गया था।

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि त्यागी बिना किसी आधिकारिक जानकारी के छुट्टी पर गए थे। मंत्रालय की ओर से बार-बार कहने पर भी उन्होंने विश्वविद्यालय में कई रिक्त पड़े पद्दों पर नियुक्तियां नहीं की। वह छुट्टी पर रहने के दौरान कार्यकारी परिषद के कामकाज को प्रभावित कर रहे थे।

पिछले सप्ताह योगेश त्यागी ने पीसी जोशी के स्थान पर नॉन कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड की निदेशक गीता भट्ट को प्रति कुलपति के पद पर नियुक्त किया था। वहीं कार्यकारी परिषद के चयन के बाद जोशी द्वारा विकास गुप्ता की नए रजिस्ट्रार के तौर पर नियुक्ति को दरकिनार करते हुए उसी दिन त्यागी ने पीसी झा को रजिस्ट्रार बना दिया था।

गतिरोध बढ़ता देख शिक्षा मंत्रालय ने हस्तक्षेप करते हुए कहा था कि छुट्टी पर रहने के दौरान उनकी नियुक्ति को वैध नहीं माना जा सकता। इसी बीच झा ने मंत्रालय को लिखा था कि वह वर्तमान में रजिस्ट्रार हैं और त्यागी का निर्णय विश्वविद्यालय के मानदंडों के अनुरूप है। इस पर भी मंत्रालय ने आपत्ति जताते हुए विश्वविद्यालय को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

 


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