​भारत-अमेरिकी सेनाओं में बढ़ेगा सैन्य सहयोग

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भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी का अमेरिकी दौरा पूरा  ​अगले साल अमेरिका के साथ होगा ​’युद्ध अभ्यास’ और ​’वज्र प्रहार’ 



नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (हि.स.)। अमेरिका यात्रा पर गए भारतीय सेना के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने तीन दिनों में अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के साथ बैठकें करके दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर करने और सैन्य सहयोग को बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा की। अपनी यात्रा के आखिरी दिन वाइस चीफ हवाई में इंडो-पैसिफिक कमांड मुख्यालय गए और ‘सैन्य-से-सैन्य जुड़ाव को आगे बढ़ाने’ के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
भारतीय सेना के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी 17 अक्टूबर को तीन दिन की यात्रा पर अमेरिका गए थे। उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ पूरी लद्दाख में चीन सीमा की अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों के लिए ‘युद्धक किट’ और अन्य खरीददारी से भी सम्बंधित था। भारत को ​​अगले साल अमेरिका के साथ दो संयुक्त अभ्यासों में भाग लेना है, जिनमें एक ​​‘युद्ध अभ्यास’ फरवरी, 2021 में और दूसरा ​​‘वज्र प्रहार’ मार्च, 2021 में होगा। इस सम्बन्ध में भी उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी पैसिफिक और दोनों सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के पहलुओं पर चर्चा की। अमेरिकी सेना के पैसिफिक कमांड के दौरे के समय उन्होंने अमेरिकी सेना के प्रशिक्षण और उपकरण क्षमताओं को देखने के अलावा सैन्य नेतृत्व के साथ बड़े पैमाने पर विचारों का आदान-प्रदान ​किया
वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी के दौरे के बारे में यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी पैसिफिक ने ट्वीट किया कि उनका यह दौरा अमेरिकी और भारतीय सेना के बीच विश्वास और पारस्परिकता का निर्माण करता है। अमेरिका और भारत की सेना के बीच फिलहाल संबंध मजबूत है और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए आगे भी अवसर मौजूद हैं। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक करीबी साझेदारी, खुला, समावेशी, शांतिपूर्ण और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र है। इस यात्रा से दोनों सेनाओं के बीच परिचालन और रणनीतिक सहयोग के बढ़ने की उम्मीद है। भारत कोविड-19 महामारी से संबंधित प्रतिबंधों के बावजूद अमेरिका के साथ दो संयुक्त अभ्यासों में भागीदारी के साथ आगे बढ़ रहा है।
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भारतीय उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सैनी अपने दौरे के आखिरी दिन हवाई में इंडो-पैसिफिक कमांड मुख्यालय गए और अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल रोनाल्ड पी. क्लार्क के साथ मुलाकात की। दोनों के बीच क्षेत्र में अमेरिकी और भारतीय सैन्य सहयोग के पहलुओं और खरीद-फ़रोख़्त के लिए सैन्य सौदे को आगे बढ़ाने, प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण पर चर्चा की। इंडो-पैसिफिक कमांड अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी एकीकृत कमांड है, जो 260 मिलियन वर्ग किमी के क्षेत्र को कवर करती है। इसका नाम 2018 में दक्षिण एशिया और विशेष रूप से भारत पर अमेरिकी रणनीतिक हितों की रक्षा करने के लिए प्रशांत कमांड से इंडो-पैसिफिक कमांड में बदल दिया गया था। यह इंडो-पैसिफिक कमांड सुरक्षा साझेदारियों का निर्माण करके, आक्रमण को रोकने के लिए और आवश्यकता पड़ने पर इंडो पैसिफिक में अमेरिका और उसके हितों का बचाव करता है।

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