पाकिस्तान के रवैये से मुंबई और पठानकोट हमले के पीड़ितों को नहीं मिला न्याय: भारत

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नई दिल्ली, 29 सितम्बर (हि.स.)। भारत ने कहा है कि 2008 के मुंबई हमलों और 2016 के पठानकोट हमले के शिकार लोगों को पाकिस्तान की अनिच्छा और असहयोग के चलते न्याय नहीं मिल पाया है। इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की कमियों को दूर किया जाना चाहिए ताकि आंतक के अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने मंगलवार को आतंक के शिकार मित्र देशों के समूह की दूसरी मंत्रिस्तरीय वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। यह वार्ता वर्चुअल माध्यम से सोमवार को हुई थी जिसमें ठाकुर सिंह ने पाकिस्तान का सीधा नाम लिए बिना उक्त बातें कहीं।

विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया कि सचिव (पूर्व) ने आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों के महत्व पर जोर दिया और कहा कि उनके खिलाफ अपराधों के लिए न्याय मिलना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले और 2016 के पठानकोट आतंकी हमले के पीड़ितों का मुद्दा उठाया।

इस दौरान सचिव (पूर्व) ने 21 अगस्त को ‘आतंकवाद के पीड़ितों को याद करने और श्रद्धांजलि अर्पित करने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के रूप में तय करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद के पीड़ितों की जरूरतों को संबोधित करने के अपने प्रयास जारी रखेगा।

अपने वक्तव्य में सचिव (पूर्व) ने दुनिया भर में आतंकवाद के शिकार निर्दोषों के दर्द और पीड़ा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मौजूदा महामारी के बीच भी, आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद न केवल इसके शिकार लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं बल्कि उनके परिवारों विशेषकर महिलाओं और बच्चों के विभिन्न अधिकारों को भी प्रभावित करते हैं। इस संदर्भ में काम किया जाना चाहिए।

बैठक का आयोजन संयुक्त राष्ट्र के काउंटर टेररिज्म कार्यालय ने किया था जिसकी अफगानिस्तान और स्पेन के विदेश मंत्रियों ने सह अध्यक्षता की।

 


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