केंद्र व दिल्ली सरकार की सहमति के बिना किसी भी अतिक्रमण को नहीं हटाया जाएगा: रेलवे

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रेल लाइनों से हटाया गया 5 से 6 प्रतिशत कूड़ा-करकट 



नई दिल्ली, 14 सितम्बर (हि.स.)। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार दिल्ली में रेल पटरियों के किनारे बसी 48 हजार झुग्गियों को हटाने के संबंध में रेलवे ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह केंद्र और राज्य सरकार की सहमति के बिना किसी भी अतिक्रमण को नहीं हटाएगी। हालांकि रेलवे ने कहा है कि वह अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रतिबद्ध है और संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर रहा है।
उत्तर रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार ने सोमवार को कहा कि रेलवे, सर्वोच्च न्यायालय के 31 अगस्त के एम.सी. मेहता बनाम भारत सरकार मामले में दिए गए आदेश का पालन करने के सभी उपाय कर रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे प्राधिकारी सभी साझेदारों जैसे 5 सितम्बर को दिल्ली सरकार के दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के साथ और फिर 10 सितम्बर को शहरी विकास मंत्रालय के साथ नियमित बैठकों का आयोजन कर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने के उपाय ढूंढ रहा है।
उन्होंने कहा कि रेलवे, शहरी विकास मंत्रालय और राज्य सरकार के साथ उचित निर्णय किए बिना किसी भी अतिक्रमण को नहीं हटाएगा । सर्वोच्च न्यायालय में आज सूचीबद्ध की गई कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन की याचिका पर सुनवाई के दौरान भी रेल मंत्रालय ने यही रूख अपनाया है।
उन्होंने कहा कि रेलवे ने रेल पटरियों के किनारों पर पड़े कूड़े-करकट को हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया है और आज तक 5 से 6 प्रतिशत कूड़ा-करकट रेल लाइनों के पास से हटा दिया है । कूड़े-करकट को साफ करने का काम 3 महीनों में पूरा हो जाएगा जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है ।

 


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