बिहार विधानसभा चुनाव : बेगूसराय में 4 सीट पर लड़ सकती है भाजपा

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बेगूसराय, 12 सितम्बर (हि.स.)। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तेज हो चुकी तैयारी से बीच राजनीतिक सरगर्मी उफान पर है। ऐसे में हमेशा से ही देश और प्रदेश के लिए एक नई राजनीतिक कहानी गढ़ने वाले बेगूसराय में भी सरगर्मी बढ़ गई है। यहां सात विधानसभा सीट हैं और तमाम सीटों पर एनडीए एवं महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला होना तय है। इसको लेकर दल और प्रत्याशियों का गणित पल-पल में बदल रहा है। एनडीए में फार्मूला के अनुसार यहां तीन-तीन और एक का गठबंधन होना है, लेकिन यह कोई जरूरी नहीं है कि तीन सीट पर भाजपा, तीन सीट पर जदयू और एक सीट पर लोजपा चुनाव लड़े।

भाजपा खगड़िया जिले की एक भी विधानसभा सीट पर चुनाव नहीं लड़कर बेगूसराय के ही चार विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ सकती है और खगड़िया की सीट अपने सहयोगी को दे देगी। भाजपा द्वारा यहां चार विस्तारक को बड़े दायित्व के साथ भेजा गया है और चारों दायित्ववान बेगूसराय, बखरी, तेघड़ा और बछवाड़ा की स्थिति का आकलन कर रहे हैं। इनकी रिपोर्ट के आधार पर आलाकमान तय करेगा। बेगूसराय से पूर्व विधायक सुरेन्द्र मेहता एवं कुंदन कुमार सिंह टिकट की दौड़ में सबसे आगे हैं। यहां अगर कुंदन सिंह को टिकट मिल जाता है तो भाजपा तेघड़ा से सुरेन्द्र मेहता को मैदान में उतार सकती है। अगर बेगूसराय से सुरेन्द्र मेहता को भाजपा टिकट देती है तो तेघड़ा से पूर्व विधायक ललन कुंवर और केशव शांडिल्य सबसे बड़े दावेदार हैं।
बखरी (सुरक्षित) में पूर्व विधायक रामानंद राम, मीनू कुमारी और राम शंकर पासवान के बीच टिकट लेने का कड़ा मुकाबला चल रहा है। जिसमें रामानंद राम सबसे पहले स्थान पर हैं, लेकिन पार्टी का ही एक धड़ा विरोध कर रहा है। ऐसे में मीनू कुमारी को टिकट मिल सकता है। बछवाड़ा से बलराम सिंह, वंदना सिंह और दुलारचंद सहनी भाजपा से टिकट लेने की रेस में आगे चल रहे हैं लेकिन हो सकता है कि यहां किसी अन्य प्रत्याशी पर पार्टी दांव खेल दे।
भाजपा बेगूसराय की चार सीट से लड़ती है तो शेष बची तीन सीट में दो सीट जदयू और एक सीट लोजपा के हिस्से में जाएगी। जिसमें से मटिहानी से जदयू विधायक नरेन्द्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह का टिकट पक्का है। जबकि चेरिया बरियारपुर से जदयू पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक मंजू वर्मा के सीबीआई के आर्म्स एक्ट मामले में आरोपी रहने के कारण टिकट नहीं देकर उनके पुत्री को मैदान में उतार सकती है। ऐसे में लोजपा के हिस्से में साहेबपुर कमाल सीट जाएगी और वहां से सुरेन्द्र विवेक प्रत्याशी हो सकते हैं। लेकिन यह भी हो सकता है कि जदयू चेरिया बरियारपुर की सीट लोजपा को दे दे और उसके बदले साहेबपुर कमाल सीट से पूर्व विधान पार्षद रुदल राय को मैदान में उतार दे।
फिलहाल, ज्यों-ज्यों चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, प्रत्याशियों की धड़कनें तेज होती जा रही है। एनडीए के तमाम सीटों से दावेदारी कर रहे नेता पल-पल बदल रहे समीकरण पर नजर रख रहे हैं, लेकिन होगा वही जो नेतृत्व चाहेगा। क्योंकि भाजपा के लिए यह चुनाव भविष्य की सर्वस्पर्शी राजनीति को बचाए रखने की चुनौती और विगत लोकसभा चुनाव में मिले वोटों के समर्थकों को सुरक्षा और लगातार बनाए रखने की चुनौती से भी जुड़ा है।

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