यूएस इकानमी औंधे मुंह गिरी, विश्व युद्ध के बाद ऐसी स्थिति नहीं थी

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लॉस एंजेल्स, 31 जुलाई (हि.स)। अमेरिका में कोरोना संक्रमण से इकानमी मौजूदा वर्ष के दूसरे क्वार्टर में औंधे मुंह गिरकर 32.09 प्रतिशत सिकुड़ गई है। ब्यूरो ऑफ इकानामिक एनालिसिस की मानें तो अमेरिकी इकानमी की ख़स्ता स्थिति में यह अभी तक का रिकार्ड  है। कहा जा रहा है कि इतनी बुरी स्थिति तो पहले और दूसरे विश्व युद्ध के बाद भी नहीं हुई थी।

कोरोना संक्रमण की दस्तक के समय अमेरिकी इकानमी की स्थिति जीडीपी के मद्देनज़र ख़राब हालत में थी। जैसे ही दूसरी तिमाही की शुरुआत हुई, लाखों लोगों के रोज़गार चले गए, लोगों के ख़र्च करने की शक्ति क्षीण हो गई, निर्यात सिकुड़ने लगा, कारोबार ठप हो गया, सेंट्रल बैंक और कांग्रेस ने खरबों डॉलर के आर्थिक राहत सहायता देकर इकानमी को पटरी पर लाने की कोशिश की। इस मद में तीन खरब डॉलर वितरित किए गए। इसके बावजूद कोरोना संक्रमण पर अंकुश नहीं लग पाने और लॉकडाउन के जारी रहने के कारण स्थितियां बद से बदतर होती गईं।
 आज स्थिति यह है कि तीन करोड़ लोग बेरोज़गार हैं। ये अभी तक केंद्र और राज्य सरकारों से बेरोज़गारी भत्ते पर जीवनयापन कर रहे थे, वह भी अब ख़त्म होने के कगार पर है। अभी तक इस 600 डॉलर प्रति सप्ताह के भत्ते पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट में सहमति नहीं होने से स्थिति उलझी हुई है। डेमोक्रेट इस आर्थिक मदद को जनवरी तक बढ़ाने के लिए प्रयत्नशील है तो रिपब्लिकन इस पर रज़ामंद नहीं है। इस बेरोज़गारी का समाज के निम्न आय वर्ग के लोगों पर पड़ा है, जो मूलत: अफ़्रीकी अमेरिकी और लेटीनो हैं।

 


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