स्वास्थ्यकर्मियों को मिलेगी पेड आइसोलेशन की सुविधा, स्वास्थ्य विभाग करेगा खर्च

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बेगूसराय, 21 जुलाई (हि.स.)।  कोरोना वायरस  की रोकथाम एवं लोगों की जांच में जुटे फ्रंटलाइन वर्कर्स तथा चिकित्साकर्मियों को अब बिहार सरकार  पेड आइसोलेशन की सुविधा देगी। इस सुविधा के तहत चिकित्साकर्मी स्वयं को आसानी से आइसोलेट कर सकेंगे ताकि कोरोना का संक्रमण   पूरी तरह से रोका जा सके। सरकारी खर्च पर होटलों में आइसोलेशन की इस सुविधा को लेकर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव उदय सिंह कुमावत ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारी एवं सिविल सर्जन को दिशा निर्देश जारी किया है।

इन तथ्यों को ध्यान में रख विभाग ने उठाये हैं कदम-
पत्र में कहा गया है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर इस रोग के चिकित्सकीय प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की जा रही है। राज्य के सरकारी अस्पतालों, जिलास्तरीय स्वास्थ्य कार्यालयों में कार्यरत कई चिकित्सक एवं पारा चिकित्साकर्मियों तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के हाल के दिनों में कोरोना से संक्रमित होने पर उनकी समुचित देखभाल आवश्यक है। कोविड पॉजिटिव अलक्षणात्मक चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सर्शत होम आइसोलेशन की सुविधा प्रदान की गयी है। लेकिन कई स्वास्थ्यकर्मी किराये के मकान में रहते हैं और उनके संक्रमित होने से होम आइसोलेशन में अड़चन आ सकती है। उन्हें घर पर सेल्फ आइसोलेशन एवं अन्य पारिवारिक संपर्क को क्वारेंटाइन करने की आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग वहन करेगा पेड आइसोलेशन का खर्च-
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अब चिकित्सक, चिकित्साकर्मियों एवं फ्रंटलाइन कर्मियों के कोविड पॉजिटिव लक्षणात्मक या अलक्षणात्मक होने पर पेड आसोलेशन के रूप में होटल की सुविधा प्रदान की जानी है। होम आइसोलेशन में कठिनाई होने पर भी उन्हें यह सुविधा प्रदान की जानी है। स्वास्थ्यकर्मियों के पेड आइसोलेशन में रहने की अवधि में होने वाले व्यय का भुगतान स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर किया जाएगा।
प्रति कमरा अधिकतम तीन हजार रुपए किये गये हैं निर्धारित-
प्रमंडलीय मुख्यालय के जिलों के होटल के लिये प्रति कमरा भोजन सहित अधिकतम तीन हजार रुपये एवं अन्य जिलों के होटल के लिए प्रति कमरा भोजन सहित अधिकतम 25 सौ रुपए का निर्धारण किया गया है। संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों के लिए होटल में कमरा आरक्षित होने की तिथि से ही भुगतान किया जायेगा। पत्र के अनुसार कोरोना पॉजिटिव चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मियों में कोरोना का किसी भी प्रकार का लक्षण आने पर, उसकी गंभीरता को ध्यान में रख कर चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में भर्ती किये जाने को भी प्राथमिकता देनी है।

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