संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 8वीं बार अस्थाई सदस्य बना भारत

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न्यूयॉर्क, 18 जून (हि.स.)। भारत आठ वर्षों के बाद आठवीं बार 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ग़ैर स्थाई सदस्य के रूप में निर्वाचित हो गया है। यह स्थान ग्रहण करने के बाद भारत और उसके मित्र देशों की कोशिश अब  सुरक्षा परिषद की संरचना को व्यापक रूप देना,  विस्तारवादी चीन पर अंकुश लगाना और भारत को सुरक्षा परिषद में एक स्थायी सदस्य के रूप में देखना है।
तुर्की के राजनयिक और राजनीतिज्ञ वोलकन बोजकिर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र के लिए अध्यक्ष के रूप अध्यक्ष चुन लिया गया है। बुधवार को महासभा की बैठक की अध्यक्षता तीजानि मुहम्मद-बाने ने की। इस बार कोविड-19 के कारण महासभा के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को ही स्थान मिल सका। इस अवसर पर भारत की ओर से एक कैम्पेन ब्रोशर जारी किया गया, जिसमें वसुधैव क़ुटुम्बकम की मूल भावना के अनुरूप कार्य किए जाने पर ज़ोर दिया गया।
अमेरिका, फ़्रांस और इंग्लैंड सहित अनेक मित्र देश पिछले कुछ वर्षों से इस कोशिश में हैं कि एशिया प्रशांत क्षेत्र के देशों में एक उभरती ताक़त के रूप में भारत को स्थाई सदस्य बनाने के लिए सुरक्षा परिषद का विस्तार किया जाना चाहिए। अभी सुरक्षा परिषद में पांंच स्थाई सदस्यों में अमेरिका, फ़्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन हैं जबकि अस्थाई दस सदस्योँ दो-दो साल के लिए चुना जाता हैं।
इस तरह प्रति वर्ष पांंच सदस्य देशों के नुमाइंदों का चुनाव होता है। एशिया प्रशांत देशों से भारत एक मात्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में था। पिछले वर्ष एशिया प्रशांत क्षेत्र के 55 देशों ने सर्वसम्मत्ति से भारत को उम्मीदवार बनाया था जिनमें पाकिस्तान और चीन भी थे।
एशिया पैसिफ़िक देशों के नुमाइंदे के रूप में भारत को 193  सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में 184 मत हासिल हुए। सुरक्षा परिषद में ग़ैर स्थाई सदस्यों के लिए होने वाले चुनाव में भारत के  अलावा आयरलैंड, मेक्सिको और नार्वे भी निर्वाचित घोषित किए गए। दो वर्षों के लिए हुए चुनाव में भारत सहित इन देशों का कार्यकाल  एक जनवरी 2021 से शुरू होगा। भारत अगले दो वर्षों तक सुरक्षा परिषद का सदस्य रहेगा। कनाडा चुनाव हार गया।
महासभा की बैठक में 192 सदस्य मौजूद थे। इसके लिए ग़ैर स्थाई सदस्य के रूप में प्रत्येक उम्मीदवार देश को दो तिहाई अर्थात 128 मतों की ज़रूरत थी। पहली बात तो यह है कि भारत के विरुद्ध कोई और उम्मीदवार नहीं था, दूसरे औपचारकता वश भारत को दो तिहाई मतों से जीत हासिल हुई।

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