इस्लामिक गणराज्य ईरान से ​233 भारतीय स्वदेश पहुंचे

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ऑपरेशन ‘समुद्र सेतु’​​ ​के तहत ​नौसेना​ अब तक ​​​मालदीव​, श्रीलंका​ से ​2874 भारतीयों को​ ला चुकी है वापस ​



नई दिल्ली, ​11 जून (हि.स.)।​ ​​ऑपरेशन ‘समुद्र सेतु’ के ​तहत भारतीय ​​नौसेना ​का जहाज ​आईएनएस शार्दुल​ गुरुवार शाम को ​​इस्लामिक गणराज्य ईरान से ​233 भारतीयों को लेकर गुजरात के पोरबंदर ​बंदरगाह पर आ गया​​​ ​यह जहाज सोमवार को सुबह ईरान के पोर्ट ऑफ बांदर अब्बास ​पहुंचा था और देर रात तक भारतीयों को सुर​​क्षित निकालकर गुजरात के ​लिए रवाना हुआ था

 
भारतीय नौसेना ने विदेशों में फंसे ​​भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए 08 मई,​ ​2020 से ऑपरेशन ‘समुद्र सेतु’ शुरू किया था। भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस जलाश्व और आईएनएस मगर अब तक ​​मालदीव और श्रीलंका से ​​2874 भारतीयों को स्वदेश ला​ ​चुके हैं। ऑपरेशन ‘समुद्र सेतु’ के अगले चरण में भारतीय नौसेना का जहाज शार्दुल भारतीय नागरिकों को लेने के लिए इस्लामिक गणराज्य ईरान के बांदर अब्बास बंदरगाह ​गया था​ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान में भारतीय मिशन ​ने उन ​भारतीय नागरिकों की सूची तैयार ​की थी को स्वदेश आना चाहते थे। 
 
नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि​ भारतीयों को​ वापस लाते समय ​कोरोना वायरस (कोविड-19) से संबंधित शारीरिक दूरी के मानदंडों का जहाज पर पूरी तरह ध्यान रखा ​गया और समुद्री यात्रा के दौरान भारतीयों को जहाज पर ही बुनियादी और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की ​गईं​​ भारतीयों को ईरान से भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पूरी तरह पालन किया ​गया। चालक दल के लिए अलगाव और संगरोध प्रोटोकॉल के साथ जहाज पर संक्रमण नियंत्रण के लिए सभी सावधानियां सुनिश्चित की गईं। जहाज पर विशेष रूप से अतिरिक्त चिकित्सा स्टाफ, डॉक्टरों, हाइजीनिस्ट, पोषण विशेषज्ञ, मेडिकल स्टोर, राशन, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, फेस-मास्क आदि का प्रावधान किया गया। उन्होंने बताया कि इसके अलावा जीवन रक्षक गियर, कोविड-19 से निपटने के लिए भारतीय नौसेना द्वारा विकसित किए गए विशिष्ट चिकित्सा उपकरण भी नागरिकों की सुरक्षा के लिए शामिल किए गए।
 
गुजरात​ पोर्ट ट्रस्ट की तरफ से टर्मिनल पर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई थी ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी यात्रियों को चिकित्सा सुविधा दी जा सके। गुजरात के पोरबंदर पोर्ट पर लाए गए नागरिकों को राज्य के अधिकारियों को सौंप दिया ​गया है ताकि उनकी देखभाल की जा सके। ​​इसके बाद बसों से सभी यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया।​ ​​
 

 


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