योगी सरकार के कानून से गोवंश माफियाओं पर लगेगी नकेल

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सात साल की जगह दस साल की होगी जेल, जुर्माना भी हुआ पांच लाख गोवंश प्रेमियों ने सरकार के फैसले का किया स्वागत गोतस्करी से जुड़े अपराधियों की फोटी सार्वजनिक जगहों पर होगी चस्पा



कानपुर, 11 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनते ही गोवध पर बराबर सख्ती की जा रही है। इसके बावजूद सांठगांठ के जरिये जनपद में गोवंशों की हत्या की जा रही थी। हाल ही में पुलिस ने ऐसी कई घटनाओं का भी खुलासा किया है, जिससे साफ है कि जनपद में गोवध नहीं रुका। इन सबके बीच अब योगी सरकार ने गोवध कानून को और सख्त कर दिया, जिससे गो तस्कर सकते में आ गये हैं। वहीं दूसरी ओर गोवंश प्रेमियों में खुशी की लहर है और उन्हे उम्मीद है कि जनपद में गोवध रुक जाएगा।
कानपुर नगर जनपद चमड़ा उद्योग का सबसे बड़ा केन्द्र है तो वहीं दूसरी तरफ यहां पर गौ तस्करों की भी भरमार है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक में इन लोगों का नेटवर्क है, जिससे गोवध का कारोबार सांठगांठ के जरिये बराबर फलता फूलता रहा। हालांकि बीच-बीच में पुलिस की सख्ती भी दिखी और ऐसे लोग बेनकाब होकर जेल भी गये, लेकिन इस अवैध कारोबार में पूर्णतया रोक नहीं लग सकी। यह अलग बात है कि जब से प्रदेश में योगी सरकार आयी तो इस कार्य में लिप्त लोगों में खौफ है और पहले की अपेक्षा गोवध का दायरा भी घटा है। चोरी-छिपे व सांठगांठ के जरिये हो रहे इस खेल को देखते हुए अब प्रदेश की योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के तहत उत्तर प्रदेश में गोवध, गोकशी या तस्करी करने वालों को सात साल की जगह दस साल की जेल और तीन लाख की जगह पांच लाख का जुर्माना लगाने का कानून बनाया है। इसके साथ ही दोबारा दोषी पाए जाने पर सजा दोगुनी हो जाएगी। गोवंश का अंगभंग करने पर भी एक से सात साल की सजा और एक लाख से तीन लाख रुपये जुर्माना होगा। अगर तस्करी के लिए ले जाया जा रहा गोवंश जब्त किया जाता है तो एक साल तक उसके भरण पोषण के खर्च की वसूली भी अभियुक्त से ही होगी। प्रदेश सरकार के इस कड़े कानून से गौ प्रेमियों ने सरकार का भूरि-भूरि स्वागत किया है। तो वहीं दूसरी ओर सांठगांठ कर इस कार्य में लिप्त गो तस्करों में मायूसी है।
गौ प्रेमियों का कहना
कानपुर जनपद की सबसे बड़ी गौशाला भौंती के सुरेश गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार गौवंश संरक्षण के लिए बराबर काम कर रही है। इसी के तहत पहले बूचड़खाने बंद कर गोवध कार्य में लिप्त लोगों में भय पैदा किया गया। इसके बाद गोवंश की जियो टैगिंग करायी गयी। ब्लॉकवार व गांववार अस्थाई गौशाला खुलवायी गयी। अब नये कानून के जरिये गोवध पर लगभग पूरी तरह से लगाम लग जाएगी, जिसका सभी गौ प्रेमी स्वागत कर रहे हैं।
चौबेपुर गौशाला के गौ प्रेमी व भाजपा नेता रामजी त्रिपाठी ने बताया कि अब तक प्रदेश सरकार ने 5,02,395 गोवंश की जियो टैगिंग कराई है। प्रदेश सरकार ने गायों के संरक्षण के लिए जो योजना बनायी है उसके तहत अब प्रदेश के सभी नगर निकायों और गांवों में अस्थायी गौशालाएं खोली जाएंगी। यही नहीं सरकार ने गौशालाओं की ऑनलाइन पंजीकरण की भी व्यवस्था की है। गौवंशों को पूरे साल भरपेट भोजन देने के लिए पहली बार प्रदेश में भूसा बैंक स्थापित किया गया है। कुल मिलाकर प्रदेश सरकार जिस तरह से गोवध पर नया कानून लागू करने जा रही है उससे गौ तस्करों पर लगाम लगेगी और उन्हें कड़ी सजा भी मिलेगी।
भाजपा नेता व गौ प्रेमी श्रीकृष्ण दीक्षित ने कहा कि गोवध निवारण अधिनियम 1955 प्रदेश में लागू हुआ था और समय-समय पर इसमें संशोधन भी हुआ, पर गोवध पर पूरी तरह से रोक नहीं लगी। इतने लंबे समय बाद पहली बार जब योगी सरकार ने इस कानून में संशोधन कर कड़े प्रावधान किया तो उम्मीद है कि प्रदेश में गोवध पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। बताया कि नये कानून के तहत सात साल तक के कारावास को आधार बनाकर गोकश जमानत पर रिहा न हो सकें, इसलिए कारावास को बढ़ाकर अधिकतम दस वर्ष, जबकि जुर्माने को तीन से बढ़ाकर पांच लाख रुपये तक कर दिया गया है। यही नहीं अब यूपी में गोकशी और गोतस्करी से जुड़े अपराधियों के फोटो भी सार्वजनिक रुप से चस्पा किए जाएंगे।

 


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