राष्ट्रपति पद के दावेदार डेमोक्रेट जोई बाइडन पर है, चीनी हैकरों की निगाहें!

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वॉशिंगटन डीसी, 06 जून (हि.स.)। जोई बाइडन के चुनाव कैम्पेन स्टाफ़ की ई-मेल पर चीनी हैकरों की निगाहें लगी हैं, तो दूसरी पारी खेलने के लिए उत्सुक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव अभियान को ईरानी हैकरों ने घेर लिया है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिन पिंग से कोरोना संकट पर मचे घमासान के बाद चीनी हैकरों की कोशिश है कि ट्रम्प कैम्पेन को जहां जैसे हो दबोच लिया जाए। गुगल के चीफ़ एनालिस्ट शाने हंटले ने ट्वीट किया है कि आप चुनाव कैम्पेन में भागीदार बन रहे हैं, तो सावधान! ई-मेल अकाउंट हैक हो सकता है। ई-मेल सुरक्षा चाक चौबंद कर लें। अग्रिम सुरक्षा ज़रूरी है।’ हालांकि गुगल को अभी तक कोई पुख़्ता सुबूत हाथ नहीं लगा है।

‘गुगल’ के इस ट्वीट पर जोई बाइडन और ट्रम्प सतर्क  हो गए हैं। अमेरिका के एक अग्रणी दैनिक न्यूयॉर्क टाइम्स और एन बी सी न्यूज़ चैनल ने कहा है कि चीनी हैकरों ने अपना काम शुरू कर दिया है। कहते हैं,’ टिक टाक इस्तेमाल करेंगे तो वह ई-मेल जानकारी तो ले ही लेगा। फिर चीन को लगता है कि जोई बाइडन चुने  जीतते हैं, तो मुमकिन है, उनको लाभ मिलेगा। बाइडन ने चीनी नीतियों पर जो टिप्पणियां की हैं, उससे चीनी ख़ुफ़िया एजेंसियां थोड़ी उलझन में हैं। लेकिन ट्रम्प की तुलना में बाइडन को मुफ़ीद मान कर चल रहे हैं। जोई बाइडन से जब पूछा गया तो उनकी चुनाव कैम्पेन टीम ने कहा कि उन्हें जानकारी है। विदेशी हैकर पीछे लगे हैं। साथ यह भी कहा कि बाइडन साइबर हमलों से बाख़ूबी सजग हैं। बाइडन भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन को सगा नहीं मानते।

सन 2008 में राष्ट्रपति चुनाव में जब वह उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे, तब बाइडन विदेश मामलों की समिति के चेयरमैन थे। इस बार कदाचित ज़िम्मेदारी अहम है। फिर अमेरिका और चीन के बीच पिछले पांच दशक में दोनों देशों के बीच ऐसे कड़वे संबंध कभी नहीं रहे हैं। इसलिए ट्रम्प और बाइडन के बीच उनके लिए कौन कितना उपयोगी है, वह जानते हैं। फिर चीनी हैकरों को यह भी मालूम है कि ट्रम्प ने ही पुतिन को ग्रुप सात के शिखर सम्मेलन में फिर से शामिल करने के लिए आमंत्रित किया है।

चीन ट्रम्प प्रशासन पर पहले से निगाहे लगाए बैठा है। ट्रम्प के स्टेट विभाग, डिफ़ेंस और ख़ुफ़िया विभाग पर उसकी पहले से निगाहें हैं। चीनी हैकरों को लगता है कि बाइडन जीतते हैं, तो सत्ता हस्तांतरण के समय ये सब ई मेल उनके लिए बड़े उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। हालाँकि गुगुल और माइक्रोसाफट सहित अन्यान्य एजेंसियों ने उनके ई मेल को चाक चौबंद किए जाने का आश्वासन दिया है। ये ई मेल चुनाव कैम्पेन के दौरान मीडिया, सहयोगी विज्ञापन कंपनियों और सरकारी तंत्र  के पास भी होते हैं।

इधर ईरानी हैकर भी ट्रम्प के चुनाव अभियान के पीछे पड़े हैं। पिछले अक्टूबर में माइक्रोसाफट ने सरकारी तंत्र, ख़ुफ़िया और मीडिया आदि पर 2700 बार साइबर हमलों से प्रशासन को  सतर्क किया था। यही नहीं, गत फ़रवरी में अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी ने ही रूसी हैकर के बारे में ट्रम्प प्रशासन को सतर्क किया  था।

 


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