विदेश मंत्री ने सुरक्षा परिषद के लिए भारत की प्राथमिकताओं की जारी की विवरणिका
नई दिल्ली, 05 जून (हि.स.)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को यहां सुरक्षा परिषद के लिए भारत की प्राथमिकताओं की एक विवरणिका जारी की है। इसमें चार विषयों के अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर एक व्यापक रुख तथा समाधान के उपकरण के तौर पर मानवीयता आधारित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने को भी प्राथमिकता देने की बात कही गयी है।
विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने इस मौके पर कहा कि सुरक्षा परिषद में हम 10 साल पहले चुने गए थे। वर्तमान समय में हम अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए चार भिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। पहली- अंतरराष्ट्रीय शासन की सामान्य प्रक्रिया पर दबाव बढ़ रहा है, दूसरी- पारंपरिक एवं गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां बेलगाम होकर बढ़ती जा रही हैं। तीसरा वैश्विक संस्थानों में पूर्ण प्रतिनिधित्व की कमी बनी हुई है, इसलिए वे कम प्रभावी हैं तथा चौथा कोरोना वायरस (कोविड-19) की महामारी एवं उसका आर्थिक असर दुनिया पर अभूतपूर्व प्रभाव डालेगा।
विदेश मंत्री ने कहा कि हम हमेशा से तार्किक आवाज और अंतरराष्ट्रीय कानून के तरफदार रहे हैं। हम वैश्विक मुद्दों के प्रति हमारे दृष्टिकोण में संवाद, विचार-विमर्श और निष्पक्षता की वकालत करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत उस वैश्विक विकास पर जोर देता है जिसमें जलवायु परिवर्तन और गरीबी उन्मूलन को धरती के भविष्य के लिए अहम माना जाए।
सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए 17 जून को चुनाव होना है। अस्थायी सदस्यता दो वर्ष के लिए होती है और भारत दस साल बाद इसके लिए चुनाव में उतरा है। एशिया प्रशांत समूह से एकमात्र मान्य प्रत्याशी होने के नाते भारत की सफलता तय मानी जा रही है।
193 सदस्य गुप्त बैलेट के जरिए करेंगे मतदान
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चुनाव महासभा के हॉल में होते हैं और इस दौरान सभी 193 सदस्य गुप्त बैलेट के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। कोविड-19 के कारण वैश्विक निकाय के मुख्यालय में जून के अंत तक की सभी बैठकें स्थगित कर दी गई हैं। इससे पहले भारत अस्थायी सीटों पर परिषद के सदस्य के तौर पर 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में निर्वाचित हो चुका है।
