हवाई यात्रा का न्यूनतम किराया तय करने में दिल्ली हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार
नई दिल्ली, 05 जून (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने हवाई यात्रा का न्यूनतम किराया तय करने के केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई के बाद ये आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान इस समस्या के समाधान का कोई गणितीय फॉर्मूला नहीं है। किराया तय करना और आर्थिक मामलों से जुड़े मामलों पर आम तौर पर कोर्ट तब तक नहीं सुनवाई करता है जब तक वो मनमाना और असंगत नहीं हों। हवाई यात्रा का किराया सरकार एयरक्राफ्ट एक्ट के तहत मिली शक्तियों के आधार पर करती है। इस मामले में कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।
वीर विक्रांत चौहान ने दायर याचिका में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से 21 मई को जारी उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी जिसमें एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए न्यूनतम किराया तय किया गया है। याचिका में मांग की गई थी कि न्यूनतम किराये का सिद्धांत पोर्ट से यात्रा करने और उन ट्रैवल एजेंटों पर भी लागू होना चाहिए जो टिकट बेचते हैं। दिल्ली से कोलकाता के लिए 4 अगस्त 2020 का किराया 2,924 रुपये से 3,152 रुपये तक के बीच का है। ये किराया सरकार की ओर से न्यूनतम किराया से भी कम है।
कोर्ट ने कहा कि वो न्यूनतम और अधिकतम मजदूरी के सरकारी फैसले पर विचार करने के लिए नहीं बैठा है। न्यूनतम किराये का प्रावधान यात्रियों और एयरलाइंस एजेंसियों के बीच संतुलन बनाये रखने के लिए किया गया है। यह एक नीतिगत मसला है जिस पर सरकार फैसला करती है। अगर याचिकाकर्ता को कोई शिकायत है तो वो सक्षम प्राधिकार के पास अपनी बात रख सकते हैं।
