आम्रपाली फ्लैट खरीददार मुफ्त में सभी सुविधाओं का लाभ नहीं उठा सकते

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ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, जेपी मॉर्गन इंडिया की संपत्ति जब्त की 



नई दिल्ली, 27 मई (हि.स.)। आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम ने आज कहा कि फ्लैट खरीददार ये न समझें कि वे बिना बकाया चुकाये ही सभी सुविधाओं का लाभ उठाते रहेंगे। सुनवाई के दौरान आज ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने जेपी मॉर्गन इंडिया की संपत्ति को जब्त कर लिया है।
सुनवाई के दौरान फ्लैट खरीददारों की ओर से वकील एमएल लाहोटी ने कहा कि उनसे अभी कोई रकम नहीं वसूली जाए। उन्होंने कहा कि फ्लैट खरीददारों की निर्माण में हुई देरी का मुआवजा मिलना चाहिए। तब जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि फ्लैट खरीददारों को ये नही समझना चाहिए कि वे बिना बकाये का भुगतान किए ही सभी लाभ उठाएंगे। चरणबद्ध तरीके से व्यावहारिक रुख अख्तियार करना चाहिए। तब लाहोटी ने कहा कि वे यह नहीं कह रहे हैं कि बिना बकाये का भुगतान किए फ्लैट खरीददार लाभ उठाएंगे बल्कि वे भी अपना पैसा लगाकर सजा भुगत रहे हैं।
सुनवाई के दौरान ईडी ने कोर्ट को बताया कि आम्रपाली मामले में जेपी मॉर्गन इंडिया की प्रॉपर्टी को जब्त कर लिया गया है। इस पर जेपी मॉर्गन इंडिया के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा की प्रॉपर्टी जब्त करना अवैध है । जेपी मॉर्गन इंडिया का आम्रपाली से कोई लेना-देना नहीं है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनबीसीसी से पूछा कि अभी उनके पास कितना फंड मौजूद है। दो-तीन महीने में उनको और कितने फंड की जरूरत पड़ेगी। कोर्ट ने एनबीसीसी से पूछा कि अगर आपको और फंड की जरूरत है तो वह फंड कहां से आएगा। अगर आपको यूनिट देखनी है तो उसके दो तरीके हैं एक आप खुद बेचे या फिर हम किसी एजेंसी से कहें।
कोर्ट ने पिछले 22 मई को केंद्र सरकार से नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी(एनबीसीसी) को पांच सौ करोड़ रुपये का फंड देने और जीएसटी में एक हजार करोड़ रुपये की रियायत देने पर विचार करने का निर्देश दिया था । प्रोजेक्ट पूरा करने का जिम्मा एनबीसीसी को सौंपा गया है। सुनवाई के दौरान आम्रपाली की संपत्तियों की बिक्री से फंड जुटाने पर चर्चा हुई थी। ईडी ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि वित्तीय सलाहकार कंपनी जेपी मॉर्गन के खातों में 187 करोड़ रुपये मिले हैं जो आम्रपाली में हुए गबन से जुड़े हैं। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को मामले में संपत्ति जब्त करने जैसी आगे की कार्रवाई करने की इजाजत दी।

 


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