सतलुज विद्युत परियोजना के 500 श्रमयोगी बन गए राष्ट्रयोगी

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लॉक डाउन में 100 साथी कर गए पलायन, मगर इन लोगों ने राष्ट्र निर्माण में दिया योगदान



उत्तरकाशी, 22 मई (हि.स.)। आजीविका की तलाश में देश के विभिन्न हिस्सों से पहाड़ आए करीब 2000 मजदूर कोरोना काल में अपने मूल स्थानों के लिए पलायन कर गए। बावजूद इसके मोरी नैटवाड़ सतलुज जल विद्युत परियोजना में लगे 500 श्रमिकों ने जाने से मना कर दिया। हालांकि इनके 100 साथी लॉक डाउन के बाद बदली परिस्थियों से घबराकर लौट गए। मगर इन 500 श्रमिकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 14 अक्टूबर 2014 के आह्वान की याद दिला दी। इस परियोजना का काम जेपी कंपनी के जिम्मे है।
प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्‍ली में पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय श्रमेव जयते कार्यक्रम में कहा था कि सम्‍मानजनक नजरिया अपनाने से ‘श्रम योगी’ (श्रमिक) पहले ‘राष्‍ट्र योगी’ और फिर ‘राष्‍ट्र निर्माता’ बन जाता है। राष्‍ट्र विकास में ‘श्रमेव जयते’ की उतनी ही अहमियत है जितनी ‘सत्‍यमेव जयते’ की है।
मोरी नैटवाड़ सतलुज जल विद्युत परियोजना से जुड़े इन मजदूरों के हौसले का जेपी कंपनी ने सम्मान किया है। लॉक डाउन में घरों से लौटने से मना करने वाले इन 500 मजदूरों को कंपनी ने सुरक्षा की पूरी गारंटी दी। सबकी  नियमित स्वास्थ्य जांच कराई गई। समय पर भुगतान किया। यह श्रमिक बैंकों के माध्यम से अपने घरों को पैसे भेज सके। कंपनी ने सभी के मोरी में खाने और ठहरने की व्यवस्था की। लॉक डाउन 4.0 में मिली छूट के बाद परियोजना में काम फिर शुरू हो गया है।
परियोजना के निर्माण कार्य में पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के करीब 500 श्रमिक लगे हुए हैं। मोरी में टौंस नदी पर 60 मेगावाट की सतलुज जल विद्युत परियोजना का काम पिछले दो साल से चल रहा है। जेपी कंपनी के प्रबंधक डॉ. केके सती का कहना है कि डॉक डाउन के दिशा-निर्देशों के दायरे में काम शुरू है। मजदूरों को सेनेटाइजर और मास्क उपलब्ध कराए गए हैं। सभी लोग शारीरिक दूरी का पालन कर रहे हैं।

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