बिहार लौटे प्रवासी, अपनी सरजमीं पर पांव रखते ही नम हुई आंखें

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सुपौल, 13 मई (हि.स.)। पंजाब के पटियाला से 1355 किमी दूरी तय कर मंगलवार को जब 04520 स्पेशल श्रमिक ट्रेन से 1144 प्रवासी अपनी सरजमीं पर पांव रखे तो खुशी से उनकी आंखें नम हो गई। अपने निर्धारित समय 5.30 मिनट से 3 घंटा 10 मिनट विलंब से पहुंची स्पेशल श्रमिक ट्रेन से आने वाले प्रवासियों को देखने के लिए मानो बेताब दिख रहा था। लेकिन सुरक्षा के ऐसे प्रबंध की परिंदे भी पर नहीं मार सकते। 9:40 मे जब ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंची तो प्रवासी धीरे धीरे अपने बोगी से निकलने लगे सभी का बारी बारी से थर्मल स्कैनिंग किया गया। ट्रेन से उतर रहे लोगों के चेहरे पर दर्द साफ झलक रहा था तो बच्चे भूख प्यास से बेचैन दिख रहे थे।
एक दिव्यांग मोनी कुमार जब बस में चढ़ने लगे तो उनके भाई पीछे छूट गया। अपनों के बिछुड़ने का गम उन्हें बार-बार पीछे मुड़ने को विवश कर रहा था। सुरक्षा कर्मी उन्हें बस पर बैठने को कह रहे थे। नम आंखों से मोनी ने कहा साहब मेरा भाई पीछे छूट गया प्लीज उसे आने दीजिए। लेकिन प्रशासनिक बंधन ऐसी थी कि सुरक्षाकर्मी उन्हें जोर जबरदस्ती बस पर बिठा दिया।
 सरिया देवी जो अपने दो बच्चों के साथ चेहरे पर दुपट्टा बांध स्टेशन पर अपनों को निहार रही थी। उन्हें यह लग रहा था शायद कोई घर से उन्हें लेने आया। लेकिन अपनों को नहीं देख बच्चों का हाथ पकड़ वे सीधे जांच कराने के लिए काउंटर पर पहुंच गई। प्रवासियों के बेबसी को देख प्रशासनिक अधिकारी भी बैचेन नजर आ रहे थे। लोगों के दर्द को देख अधिकारी अपने में बात कर रहे थे कि कोरोना लोगों को वास्तविक स्थिति में ला दिया है।
डीपीआरओ अनुराग कुमार ने बुधवार को यहां बताया कि कुल 1144 प्रवासी आए। जिसमे पिपरा प्रखंड के सबसे अधिक 214 और सबसे कम सुपौल नगर परिषद के 10 प्रवासी घर लौटे।

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