इंडियनऑयल ने लॉकडाउन के बाद मथुरा और पानीपत की रिफाइनरी शुरू कीं

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कर्मचारियों की कमी से अभी रिफाइनरी 60 प्रतिशत चालू, माह के अंत तक और बढ़ाने की योजना



मथुरा, 13 मई (हि.स.)। पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने मथुरा और पानीपत की अपनी रिफाइनरी की कई प्रोसेस यूनिटों को फिर से शुरू कर दिया है जो लॉकडाउन के कारण बंद हो गई थीं। लॉकडाउन की वजह से कर्मचारियों की कमी होने से यह रिफाइनरियां वर्तमान में लगभग 60 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही हैं लेकिन इसे माह के अंत तक 80 प्रतिशत क्षमता के साथ चलाए जाने की योजना है।
महामारी कोरोना वायरस से जंग जारी है और इस लड़ाई में इंडियन ऑयल मथुरा रिफाइनरी कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रही है। आम जनता और सरकार का साथ निभा रही है। समाज के हर वर्ग के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कटिवद्ध है। रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक एवं रिफाइनरी प्रमुख अरविन्द कुमार ने बुधवार को बताया कि रिफ़ाइनरी को 60 प्रतिशत क्षमता के साथ चलाया जा रहा है। इस माह के अंत तक और क्षमता बढ़ाए जाने की योजना है। वर्तमान में लॉकडाउन के चलते कर्मचारियों की संख्या थोड़ी है, इसलिए संविदकर्मियों द्वारा रिफाइनरी के कार्य करवाए जा रहे है। रिफाइनरी परिसर में आने वाले सभी कर्मचारियों को पहले सेनेटाइज किया जाता है और परिसर को रोजाना सेनिटाइज कराया जा रहा है।
 
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड कारपोरेट संचार के मुख्य महाप्रबंधक जॉन प्रसाद के. ने बताया कि इंडियनऑयल ने अपने पानीपत परिसर में एचडीपीई (हाई डेन्सिटी पॉलीथीन) और पॉलीप्रोपलीन जैसे पेट्रोरसायन इंटरमिडिएट्स का निर्माण फिर से शुरू कर दिया है। इन ग्रेडों की मांग आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने की संभावना है। पानीपत में नेफ्था क्रैकर के साथ-साथ एमईजी (मोनो-एथिलीन-ग्लाइकोल) संयंत्र फिर से चालू हो गया है। पारादीप में पॉलीप्रोपलीन संयंत्र भी कुछ दिनों में कार्य करना शुरू कर देगा। इसी क्रम में अन्य पॉलिमर यूनिटों को भी इस महीने चालू करने के लिए तैयार किया जा रहा है। पानीपत नेफ्था क्रैकर के रिवाइवल से रिफाइनरी कच्चे तेल के थ्रूपुट में भी और अधिक वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि हालांकि देशव्यापी लॉकडाउन ने पेट्रोलियम उत्पादों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, फिर भी इंडियनऑयल ने उत्पाद की मांग के बढ़ने पर अपनी सभी रिफाइनरी यूनिटों को बड़े पैमाने पर उच्चतर थ्रूपुट के लिए ‘हॉट’ स्टैंडबाय पर तैयार रहने के लिए कहा है। कोविड लॉकडाउन से पहले कॉर्पोरेशन की रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर कार्य कर रही थी, लेकिन मांग में तेज गिरावट और उत्पाद को नियंत्रित करने के मद्देनज़र थ्रूपुट में कटौती करनी पड़ी थी। अप्रैल 2020 के पहले सप्ताह में उत्पादन को घटाकर लगभग 45 प्रतिशत करना पड़ा। पेट्रोल, डीजल, एटीएफ, फ्यूल ऑयल, कोलतार इत्यादि की बिक्री में काफी कमी होने के बावजूद एलपीजी रसोई गैस की मांग में तेज वृद्धि हुई। रिफाइनरियों ने एफसीसी/ इंडमैक्स जैसी यूनिटों से एलपीजी उत्पादन में बढ़ोत्तरी करके इस चुनौती को पूरा किया।
पानीपत में इंडियनऑयल के नेफ्था क्रैकर को मार्च 2020 में अपनी डिजाइन क्षमता से अधिक पर चलाने का फैसला किया गया था लेकिन लॉकडाउन के चलते थ्रूपुट को क्रमानुसार कम करना पड़ा। साथ ही पॉलिमर उत्पाद के स्टॉक बढ़ने और लॉजिस्टिक की समस्या के कारण कुछ यूनिटों को बंद भी करना पड़ा। लॉकडाउन की पाबंदियों को धीरे-धीरे हटाए जाने पर प्लास्टिक पैकेजिंग, चिकित्सा आपूर्ति और खाद्य पैकेजिंग क्षेत्रों में कई डाउनस्ट्रीम उद्योगों ने अप्रैल 2020 के अंत तक परिचालन फिर से शुरू कर दिया है। इस वजह से इन उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर ग्रेड जैसे बीओपीपी, जीपीबीएम, पीपी राफिया और पीपी यार्न की पानीपत से आपूर्ति शुरू हो गयी है।

 


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