बेटियों ने एकान्तवास के बाद फिर से अस्पताल जाने का दिया हौसला : डॉ. पायल निंद्रा

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नई दिल्ली, 10 मई (हि.स.) कोरोना वॉरियर कहे जाने वाले डॉक्टर्स की भूमिका इस दौर में अहम हो गई है। डॉक्टर भगवान का रूप है, लेकिन इस खतरे की चपेट में वे भी आ रहे हैं। कोरोना के खतरे को जानते बूझते हुए भी डॉक्टर अपने दायित्व को बखूबी निभा रहे हैं। आज मातृत्व दिवस (मदर्स डे) के मौके पर भी रोजाना की तरह कई महिला डॉक्टर अपना फर्ज निभाते हुए मां का दायित्व भी निभा रही हैं।
सर गंगाराम अस्पताल की डॉक्टर पायल निंद्रा के लिए भी मदर्स डे खास है। कोरोना के मरीज के संपर्क मे आने के बाद उन्हें 15 दिनों के लिए एकान्तवास (क्वारंटीन) में जाना पड़ा। इस संकट के काल में डॉक्टर पायल ने एक मां और चिकित्सक की भूमिका बखूबी अदा की। उन्होंने अपने अनुभव हिन्दुस्थान समाचार के साथ साझा किए…
कठिन दिनों में बेटियां बनीं सहारा
सर गंगा राम अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर पायल निंद्रा को कोरोना मरीज के संपर्क में आने के बाद 15 दिनों के लिए क्वारंटीन में रहना पड़ा। डॉ. पायल बताती हैं कि इन दिनों में अपनी 10 साल और 4 साल की बेटी से फोन पर बात करके हिम्मत जुटाती थी। हर पल अपनी रिपोर्ट का ख्याल रहता था क्योंकि डॉक्टर होने के नाते संक्रमण के खतरे से भली भांति परिचित थीं। उन्होंने बताया कि बच्चियों के हिम्मत वाले बोल से सकारात्मक रहने में मदद मिलती है। उनका यह कहना कि मम्मी आपको कुछ नहीं हो सकता…आप जल्दी ही घर आ जाओगी, एक टॉनिक की तरह काम करता था। बच्चों को फोन पर वीडियो कॉल के माध्यम से ख्याल रखना भी अलग ही अनुभव है।
जब 10 साल की बेटी ने चेयरमैन को लिखी चिट्ठी
डॉ. पायल निंद्रा  बताती हैं कि जब क्वारंटीन का समय पूरा हुआ तो फिर से अस्पताल ज्वाइन करने की मजबूरी थी। ऐसे समय में 10 साल की बेटी क्रित्वी ने उनके चेयरमैन को चिट्ठी लिख डाली। बेटी ने लिखा कि मेरी मम्मी को समय पर घर आने दें और अगर वे कोरोना मरीजों को देखें तो उन्हें पूरी तरह पीपीई सूट और मास्क दिया जाए। वे बताती हैं कि बेटियां इतना ख्याल रखती हैं कि घर लौटने के बाद ही पूरी पूछताछ शुरू हो जाती है, उनके सवाल भी बड़े मैच्योर होते हैं, जैसे आज कितने मरीज देखें? पूरे दिन मास्क पहना था कि नहीं? समय पर खाना खाया या नहीं? जबकि यह सारे सवाल मां को पूछने चाहिए। मां को भी बच्चों से काफी कुछ सीखने को मिलता है।
कोरोना से डरने का नहीं, सावधानी बरतने का समय
डॉ. पायल कहती हैं कि एक डॉक्टर होने के साथ-साथ वे मां भी हैं… इसलिए उन्हें पूरी सावधानी के साथ काम पर जाना पड़ता है। वे लोगों को भी सलाह देती हैं कि कोरोना से लोग घबराए नहीं क्योंकि घबराने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसलिए लोगों को धैर्य के साथ इस समय को काटें और खुद बचाए रखें। उन्होंने बताया कि इस काल में खासकर हर व्यक्ति को सकारात्मक रहने की जरुरत है क्योंकि कोरोना को उसके अंदर की शक्ति ही हरा सकती है। सकारात्मक रहने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है और वो ही इस बीमारी को हरा सकता है।

 


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