अंग्रेजों ने 1857 के स्वाधीनता संग्राम को मात्र सिपाही विद्रोह का नाम देकर किया भ्रामक प्रचार : उपराष्ट्रपति

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नई दिल्ली, 10 मई (हि.स.)। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को प्रथम स्वाधीनता संग्राम की 163वीं वर्षगांठ पर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने 1857 के स्वाधीनता संग्राम को मात्र सिपाही विद्रोह का नाम देकर भ्रामक प्रचार किया।
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ट्वीट कर कहा, 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम की 163वीं वर्षगांठ के अवसर पर अंग्रजों के शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले भारत मां के वीर सपूतों और बेटियों का श्रृद्धा वंदन करता हूं। वेंकैया ने कहा कि उनकी वीर गाथाएं हमारी परंपरा, हमारी लोक चेतना में बसी हुई हैं, हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत रही हैं। यह मात्र सिपाहियों की बगावत नहीं थी जैसा कि अंग्रजों ने भ्रामक प्रचार फैलाया, वस्तुतः यह हमारी आज़ादी का संग्राम था।
नायडू ने कहा कि हर भारतीय को विशेषकर हमारे युवाओं को हमारे स्वाधीनता संग्राम के सेनानियों के त्याग और तपस्या से प्रेरणा लेनी चाहिए तथा देश की एकता व अखंडता को सुदृढ़ करने के हरसंभव प्रयास करने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि 1857 में आज ही के दिन मेरठ (उत्तर प्रदेश) से अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की शुरुआत हुई थी। इसको समस्त भारतवासी 10 मई को प्रत्येक वर्ष ”क्रान्ति दिवस“ के रूप में मनाते हैं। क्रान्ति की शुरुआत करने का श्रेय अमर शहीद कोतवाल धनसिंह गुर्जर को जाता है। मेरठ से निकली इसी चिंगारी की आग दादरी होते हुए बुलंदशहर तक पहुंची और अंग्रेजी शासन के खिलाफ विकराल रूप धारण करती गई।

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