मातृत्व अवकाश नहीं बन सकता अनुबंधित कर्मचारियों के कार्यकाल विस्तार में रोड़ा: हाई कोर्ट

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हाई कोर्ट ने अरविंदो कॉलेज को दिया एक सप्ताह के भीतर सेवा बहाल करने का आदेश  कोर्ट ने कॉलेज पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का भी आदेश दिया



नई दिल्ली, 08 मई (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने मातृत्व अवकाश लेने के आधार पर एक तदर्थ महिला प्रोफेसर के सेवा विस्तार को समाप्त करने के फैसले को खारिज कर दिया है। जस्टिस हीमा कोहली और जस्टिस आशा मेनन की बेंच ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये फैसला सुनाते हुए संबंधित कॉलेज को एक सप्ताह के भीतर तदर्थ महिला प्रोफेसर की सेवा बहाल करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने तदर्थ महिला प्रोफेसर की सेवा का नवीनीकरण नहीं करने पर दिल्ली के अरविंदो कॉलेज पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। महिला प्रोफेसर अरविंदो कॉलेज में तदर्थ प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थी। उसकी संविदा 18 मार्च को 2019 को खत्म हो रही थी। संविदा कार्यकाल के दौरान दो कार्यकालों के बीच एक दिन के नाममात्र का अवकाश देने के बाद 120 दिनों के लिए नवीनीकृत करने की प्रथा रही है।
22 फरवरी, 2019 को महिला प्रोफेसर ने कॉलेज को मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत मातृत्व अवकाश देने का आग्रह किया था। इसके लिए महिला प्रोफेसर ने कई बार कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। 27 मार्च, 2019 को कॉलेज प्रशासन ने महिला प्रोफेसर को एक पत्र के जरिये सूचित किया कि कॉलेज ने उन्हें ड्यूटी ज्वायन करने के लिए मजबूर नहीं किया था और उन्हें कॉलेज ज्वायन करने की तारीख के बारे में सूचित करना चाहिए था।
बाद में कॉलेज ने प्रोफेसर को एक और पत्र लिखकर मातृत्व लाभ के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए कहा कि दिल्ली युनिवर्सिटी संविदा शिक्षकों को मातृत्व लाभ नहीं देता है। 24 मई, 2019 को प्रोफेसर ने अपनी ड्यूटी जारी रखने के लिए कॉलेज को सूचना दी। उसके पांच दिनों के बाद ही कॉलेज ने प्रोफेसर को सूचित किया कि उनका कार्यकाल 18 मार्च, 2019 को समाप्त हो गया है।


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