लॉकडाउन का पालन कराने के लिए सेना की तैनाती का फैसला सरकार लेगी

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नई दिल्ली, 08 मई (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए सेना बुलाने की मांग पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता से कहा कि आप याचिका वापस लीजिए। यह सरकार पर छोड़ दीजिए कि सेना कहां भेजनी है।
याचिका मुंबई के रहने वाले कमलाकर शेनॉय की याचिका ने यह याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियां कोरोना के संकट के दौरान सभी लोगों को सुरक्षित जीवन देने में नाकाम रही है। कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ने के बावजूद कई स्थानों पर भीड़ एकत्र हो रही है। याचिका में कई उदाहरण दिए गए हैं जिनमें काफी लोग एकत्र हुए हैं। उनमें दिल्ली के आनंद विहार बस टर्मिनल पर यूपी और बिहार के प्रवासी मजदूरों का हजारों की संख्या में जमा होने की घटना का जिक्र है। दिल्ली सरकार उन मजदूरों को अपना घर छोड़ने से नहीं रोक सकी बल्कि उन्हें बसों से आनंद विहार छोड़ा।
याचिका में कहा गया कि 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा करने के बाद भी गुजरात, तेलंगाना और मुंबई में हजारों लोगों का जमावड़ा हुआ। इन राज्यों में लोगों को एक जगह जुटने से नहीं रोका गया, जिसकी वजह से ये राज्य कोरोना संक्रमित शीर्ष दस राज्यों में शामिल हो गए। इसलिए राज्यों की एजेंसियों की जगह लॉकडाउन का पालन करने का जिम्मा सेना को दिया जाना चाहिए।

 


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