संसदीय समितियों की बैठक के लिए महासचिव जल्द बनाएं वैकल्पिक व्यवस्था

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नई दिल्ली, 07 मई (हि.स.)। भारत के उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापित एम. वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने राष्ट्रव्यापी कोविड-19 की महामारी की वजह से यात्राओं पर लगे प्रतिबंधों को देखते हुए विभिन्न संसदीय समितियों की बैठकें कराए जाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। गुरुवार को मुलाकात के बाद दोनों पीठासीन अधिकारियों ने दोनों सदनों को महासचिवों को निर्देश दिया कि जल्द ही बैठकों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
बैठक में दोनों पीठासीन अधिकारियों का विचार था कि यदि ऐसी स्थिति में निकट भविष्य में भी रहे और समितियों की परंपरागत पद्धति से बैठकें कराई जानी संभव न हो तो किसी वैकल्पिक व्यवस्था की संभावनाएं खोजी जानी चाहिए। उन्होंने महासचिवों को निर्देश दिया कि इसके लिए अन्य देशों के अनुभवों, उनके द्वारा विकसित प्रथाओं और प्रणालियों की जानकारी लेनी चाहिए ताकि आवश्यक व सुरक्षित टेक्नोलॉजी की उपलब्धता, ऐसी टेक्नोलॉजी को प्राप्त करने में लगने वाले संभावित समय आदि मुद्दों का अध्ययन किया जा सके। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से स्थाई समितियों की बैठकें कराए जाने के संभावित परिणामों की समीक्षा करें। दोनों सदनों के महासचिवों का यह अध्ययन पीठासीन अधिकारियों द्वारा इस विषय पर भविष्य के लिए सुविचारित निर्णय लेने में आधार प्रदान करेगा।
दोनों पीठासीन अधिकारियों की मुलाकात के दौरान देश में व्याप्त कोविड-19 संक्रमण की स्थिति, इस महामारी के विरुद्ध अभियान में संसद सदस्यों द्वारा निभाई जा रही सक्रिय भूमिका और संसदीय समितियों की बैठक कराए जाने की संभावना पर विचार विमर्श किया। दोनों पीठासीन अधिकारियों ने सांसदों द्वारा शुरू किए गए कल्याणकारी कार्यक्रमों के अलावा सरकार व समाजसेवी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे अनेक मानवीय कार्यक्रमों में भी सांसदों द्वारा सक्रिय सहयोग दिए जाने पर संतोष व्यक्त किया कि आपदा की इस घड़ी में जब लोगों को उनके जन प्रतिनिधियों की सर्वाधिक आवश्यकता है तो ऐसे में सांसदगण क्षेत्रों में अपने लोगों के बीच हैं।

 


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