ट्राईफेड जनजातीय कारीगरों के उत्पादों को खरीदेगी : अर्जुन मुंडा

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नई दिल्ली/रांची, 05 मई (हि.स.)। जनजातीय कार्य मंत्रालय कोविड-19 से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए लगातार जनजातियों की आजीविका के संसाधन निरंतर उपलब्ध हों, इस दिशा में प्रयत्नशील है। मंत्रालय ने जनजातीय संग्रहकर्ताओं एवं कारीगरों की आजीविका और सुरक्षा के लिए एक और तात्कालिक उपाय किए हैं। इस संबंध में जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने मंगलवार को बताया कि मंत्रालय की अनुषंगी इकाई ट्राईफेड देशभर में जनजातीय कारीगरों से 23 करोड़ रुपये मूल्य के जनजातीय उत्पादों की खरीद करेगी। जनजातीय कारीगरों के सामने आने वाली अभूतपूर्व कठिनाइयों के आलोक में, सरकार जनजातीय संग्रहकर्ताओं और जनजातीय कारीगरों को सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल कई पहल कर रही है। मंत्रालय ने पहले ही ‘जनजातीय उत्पादों के विकास एवं विपणन के लिए संस्थागत सहायता’ स्कीम के तहत गौण वन उपज के मदों की एमएसपी में बढ़ोतरी कर दी है। इस स्कीम के तहत ट्राईफेड लगभग 10 लाख जनजातीय कारीगरों के परिवारों से जुड़ी है चूंकि पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रव्यापी लाकडाउन के कारण जनजातीय कारीगरों की सारी वाणिज्यिक गतिविधियां रुक गई है। कारीगरों के समक्ष अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गयी है,जिसका असर उनकी आजीविका पर पड़ा है। उनके द्वारा बनाये गये सामान की बिक्री नाम मात्र की रह गयी है। कारीगरों के द्वारा बनाये गये वस्त्र, उपहार एवं सजावट, वन धन, प्राकृतिक वस्तुएं, धातु, आभूषण, जनजातीय चित्रकारी, पौट्री, केन एवं बांस आदि की खरीद होगी।
मुंडा ने बताया कि जनजातीय समुदाय को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए कई और कदम उठाये गए हैं। ट्राईफेड उद्योग संघों, प्रमुख कंपनियों एवं व्यावसायिक संगठनों के पास जनजातीय कारीगरों के भंडार की खरीद के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस वेबिनारों के माध्यम से प्रोत्साहित करेगी। फ्रैंचाइजी माडल की खोज की जा सकती है। अनिवार्य वस्तुओं (वन धन नैचुरल्स) जैसे कि शहद, साबुन, मसाले, चावल, चाय और काफी की किस्मों आदि की थोक आपूर्तियों की खरीद की जा सकती है और नियमित आपूर्तियों के लिए करार किया जा सकता है। वर्तमान स्थिति में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए कुछ जनजातीय कारीगरों द्वारा मास्क एवं हैंड सैनिटाइजरों का निर्माण किया जा रहा है। ट्राइब्स इंडिया कारीगरों को मासिक राशन का प्रावधान भी कर रही है। जनजातीय कारीगरों को कुछ राहत उपलब्ध कराने के लिए स्टैंड विथ ह्यूमनिटी अभियान के साथ जुड़ने के लिए आर्ट आफ लिविंग फाउंडेशन के साथ भी करार किया है। इसमें भारत भर में जनजातीय परिवारों को 1000 रुपये के मूल्य के राशन किटों की खरीद एवं वितरण (सोशल डिस्टेंसिंग दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए) शामिल है। प्रत्येक राशन किट में 5 किग्रा गेहूं का आटा, 2 किग्रा दाल, 3 किग्रा चावल, 500 एमएल तेल, 100 ग्राम हल्दी का पावडर, 100 ग्राम लाल मिर्च का पावडर, 100 ग्राम जीरा, 100 ग्राम राई के बीज, 100 ग्राम करी मसाला, 2 साबुन जैसी मदें शामिल हैं। छोटे कारीगरों के लिए कार्यशील पूंजी का प्रावधान हो रहा है।
ट्राईफेड जनजातीय कारीगरों को सॉफ्ट लोन के लिए अनुकूल वित्तपोषण शर्त उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय संस्थानों के साथ चर्चा कर रही है, जिसका लाभ उनके भंडार को गिरवी रखने के द्वारा उठाया जा सकता है। जनजातीय कारीगरों के लिए ऐसी कार्यशील पूंजी एवं तरलता का प्रावधान उन्हें इस अभूतपूर्व कठिनाई से उबरने में सक्षम बनायेगा। जनजातीय क्षेत्रों में मास्कों, साबुनों, दस्तानों एवं पीपीई किट का प्रावधान किया गया है। कोविड-19 के कारण वर्तमान स्थिति ने देश के सबसे निर्बल लोगों, जनजातीय कारीगरों एवं संग्रहकर्ताओं सहित निर्धनों एवं सीमांत समुदायों की आजीविकाओं को गहरी चोट पहुंचाई है। कई क्षेत्रों में यह वन उत्पादों की खेती एवं संग्रह का पीक सीजन है। जनजातीय कारीगरों एवं संग्रहकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जनजातीय लाभार्थियों को क्रमशः एक मिलियन फेस मास्क, साबुन एवं दस्ताने एवं 20,000 पीपीई किट उपलब्ध कराने का है। ट्राईफेड ने यूनिसे़फ के सहयोग से सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करने और आवश्यक स्वच्छता बनाये रखने के लिए जनजातीय संग्रहकर्ताओं के बीच जागरूकता फैलाने के लिए भी काम कर रही है।

 


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