बैंकों में छह महीने तक नहीं होगी हड़ताल, यूनियन भी सरकार के साथ

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नई दिल्‍ली, 24 अप्रैल (हि.स.)। कोविड-19 की महामारी को फैलने से रोकने के लिए जारी लॉकडाउन और अर्थव्‍यवस्‍था को मंदी से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़ा फैसला किया है। इस कड़ी में सरकार ने बैंकिंग सेक्टर को 6 महीने के लिए जन उपयोगी सेवाओं में शामिल कर लिया है। यह बदलाव इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट के अंतगर्त किया गया है। बता दें कि बैंकिंग सेवाओं के एक्ट में शामिल होने के बाद अब कोई भी कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल नहीं कर सकेगा। ये नया नियम 21 अप्रैल से लागू हो गया है।

हालांकि, बैंक यूनियन मौजूदा परिस्थिति में न हड़ताल के पक्ष में थी और आने वाले वक्‍त में कोई हड़ताल करने वाली है। ये बात शुक्रवार को दिल्ली प्रदेश बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन महासचिव, अशवनी राणा ने कही है। राणा ने कहा कि बैंक यूनियंस इतनी भी गैर-जिम्मेदार नहीं हैं कि वो देशव्‍यापी इस संकट की घड़ी में हड़ताल पर जाएंगे।

गौरतलब है कि वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले वित्त विभाग की तरफ से  20 अप्रैल, 2020 को जारी सर्कुलर में ये कहा गया है कि श्रम मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन के जरिए बैंकिंग इंडस्ट्री को 6 माह के लिए जन उपयोगी सेवाओं  में शामिल कर लिया है। वित्त विभाग ने कहा है कि ये समय-सीमा 21 अप्रैल   से लागू हो गई है।

वहीं, श्रम मंत्रालय की ओर से 17 अप्रैल को जारी नोटिफिकेशन में ये कहा गया  है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण आर्थिक गतिविधियों पर बड़े पैमाने पर असर पड़ा है। इसी कारण से बैंकिंग सेक्टर को जन उपयोगी सेवाओं में शामिल किया गया है।

उल्लेखनीय है कि वित्तीय सेवा विभाग ने नए कानून के लागू होने के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर, एसबीआई के चेयरमैन, राष्ट्रीयकृत बैकों के एमडी और सीईओ के अलावा इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के सीईओ को सर्कुलर भेज दिया गया है। दरअसल बैंकिंग सेक्टर में एक दर्जन से ज्यादा कर्मचारी और अधिकारी यूनियंस हैं। यह यूनियंस प्रत्येक तीन साल की अवधि पर आईबीए के साथ वेतन समेत अन्य मुद्दों पर विचार करती हैं। बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक आईबीआई के सदस्य हैं।

 


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