सरकारी गाड़ी से बेटी को कोटा से पटना लाने गए थे  भाजपा विधायक , ड्राइवर को शोकॉज

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बिहार विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के सचेतक हैं हिसुआ विधायक अनिल सिंह



पटना, 20 अप्रैल (हि.स.)। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के बीच राजस्थान के कोटा से अपनी बेटी को पटना लेकर आने वाले नवादा जिले  के हिसुआ से भारतीय जनता पार्टी के विधायक अनिल सिंह का मामला तूल पकड़ने लगा है। बिहार विधानसभा में सत्तारूढ़ दल भाजपा के सचेतक अनिल सिंह के सरकारी गाड़ी के ड्राइवर से स्पष्टीकरण पूछा गया है कि लॉकडाउन के दौरान सरकारी गाड़ी का उपयोग क्यों किया। दरअसल, भाजपा विधायक अनिल सिंह विधानसभा में पार्टी के सचेतक हैं। इस नाते उन्हें सरकारी गाड़ी मिली हुई है और उन्होंने अपनी बेटी को कोटा से लाने के लिए उसी गाड़ी का इस्तेमाल किया था।

हालांकि, मामला सामने आने के बाद विधायक अनिल सिंह ने ने सफाई देते हुए कहा था कि मैंने एक पिता की जिम्मेदारी निभाई है। मेरी बेटी कोटा में परेशान थी। मैंने लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं किया है। जिला प्रशासन की अनुमति और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बेटी को वहां से लेकर आया हूं।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी उठाया था सवाल  

वहीं, इस पास के सामने आते ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर हमला बोल दिया। कहा, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यूपी के सीएम को लॉकडाउन के नियमों और उद्देश्यों का पाठ पढ़ाते हुए कह रहे थे कि उन्हें कोटा में फंसे छात्रों को वापस लाने के लिए बसों को अनुमति नहीं देनी चाहिए थी। यह मर्यादा के विरुद्ध है। वहीं दूसरी तरफ़ अपने समर्थक विधायक को गोपनीय तरीक़े से उनके बेटे को राजस्थान के कोटा से वापस लाने की अनुमति दे रहे हैं। बिहार में ऐसे अनेकों वीआईपी और अधिकारियों को पास जारी किए गए हैं।

नीतीश ने कहा था, अगर ऐसा होगा तो फिर लॉकडाउन का क्या मतलब

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राजस्थान के कोटा में फंसे छात्रों को वापस लाने के लिए बसें भेजी थी। इसका पुरजोर विरोध करते हुए एक दिन पहले शनिवार को भी नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान स्पष्ट कर दिया था कि कोटा में फंसे छात्रों को बुलाने की जो मांग की जा रही है पूरी तरह से गलत है। ऐसे में लॉकडाउन का क्या मतलब रह जाएगा। राजस्थान भेजे गए बसों की परमिट रद्द कर देनी चाहिए।

 


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